लाहौल-स्पीति। हमारे हिमाचल की रामायण में माता सीता को रावण की बेटी माना जाता है और हमारी रामायण के अनुसार: राम-रावण का युद्ध इसलिए हुआ था- क्योंकि भगवान राम ने सीता जी से लव मैरिज कर ली थी।
लंका में हुआ मां सीता का जन्म
लाहौल में पीढ़ियों से ये कथा सुनाई जाती है- कि माता सीता का जन्म लंका में हुआ था। कहानी की शुरुआत होती है एक ब्राह्मण से जो लक्ष्मी माता की स्तुति में लीन था और उसके सामने एक कलश रखा था।
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मंदोदरी को दिया विष का कलश
कहते हैं कि ब्राह्मण के ध्यान टूटते ही रावण वो कलश उठा ले गया और उसे अपनी पत्नी मंदोदरी को देकर कहा- इसमें विष है, इसे संभाल कर रखना। इसके बाद रावण फिर तपस्या करने चला गया।
विष से गर्भवती हो गई मंदोदरी
मगर कुछ समय बाद, मन की उलझनों में घिरी मंदोदरी वही “विष” पी लेती है और उसी से गर्भवती हो जाती है। अब यहीं से ये कथा दो रूपों में आगे बढ़ती है। पहला रूप कहता है- जन्मी हुई कन्या को मंदोदरी डर के कारण मिट्टी में दबा देती है। यही कन्या बाद में राजा जनक को हल चलाते समय मिलती है।
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बेटी से ही होगा रावण का अंत
फिर दूसरा रूप बताता है- रावण को भविष्यवाणी मिलती है कि मंदोदरी की बेटी ही उसका अंत करेगी। रावण आदेश देता है कि यदि पुत्री जन्मे तो उसे मार दिया जाए। मगर मंदोदरी ऐसा होने नहीं देती और जन्म लेते ही कन्या को भूमि में छुपा देती है, जहां से राजा जनक उसे पाते हैं।
राम-सीता का हुआ प्रेम विवाह
लाहौल की मान्यता में भगवान राम और माता सीता का विवाह प्रेम विवाह माना गया है और राम-रावण युद्ध का कारण भी यही बताया जाता है- कि रावण अपनी ही पुत्री के इस विवाह को स्वीकार नहीं कर पाया। लाहौल के इतिहासकार बताते हैं- कि ये रामायण कभी लिखी नहीं गई लेकिन इस कथा का वाचन सदियों से चलता रहा है और आज भी लोक-चेतना का हिस्सा है।
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मंदिर में पूजा करते 2 समुदाय
इसी से जुड़ी मान्यताएं त्रिलोकीनाथ मंदिर तक जाती हैं- जहां हिंदू और बौद्ध, दोनों समुदाय अपने-अपने तरीके से पूजा करते हैं। यहां माता सीता को धरती पुत्री भी माना जाता है और मंदिर की मूर्ति को शिव, माता या अवलोकतेश्वर- हर रूप में श्रद्धा मिलती है।
