ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला में स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में डॉक्टरों की कथित लापरवाही से 30 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया और अस्पताल परिसर में शव के साथ धरना प्रदर्शन किया। मृतक युवक को गंभीर हालत में PGI चंडीगढ़ रेफर किया गया था, लेकिन बीच रास्ते में एंबुलेंस को वापस बुला लिया गया। PGI पहुंचने से पहले ही युवक ने दम तोड़ दिया।

सिर के बल गिरा, फिर इलाज में देरी

मृतक की पहचान अभी कीर्ति, पुत्र डॉ. आत्मा राम, निवासी जसाना (बंगाणा) के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार सोमवार शाम को कीर्ति दूध लाने के दौरान बारिश में फिसलकर सिर के बल गिर पड़ा और बेहोश हो गया। पहले उसे बंगाणा अस्पताल ले जाया गया, फिर ऊना अस्पताल रेफर कर दिया गया। शाम करीब 6 बजे जब उसे ऊना अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया तो परिजनों के अनुसार कई घंटे तक न तो उपचार मिला और न ही डॉक्टरों की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी दी गई।

 

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रास्ते से बुलाया वापस, तीन घंटे गंवाए

कुछ देर बाद उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से मैहतपुर के पास से एम्बुलेंस को फिर वापस बुला लिया गया। अस्पताल लौटने के बाद डॉक्टरों ने नाली डालन जैसी प्रक्रिया में कीमती समय गंवा दिया। करीब तीन घंटे बाद जब दोबारा मरीज को चंडीगढ़ भेजा गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पीजीआई में युवक को मृत घोषित कर दिया गया।

 

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परिजनों की मांग: डॉक्टर के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस

परिजनों ने आरोप लगाया कि यदि समय पर इलाज मिल जाता और एम्बुलेंस को बीच में वापस न बुलाया जाता, तो कीर्ति की जान बच सकती थी। उन्होंने इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर को निलंबित करने और गैर इरादतन हत्या (IPC 304) का मामला दर्ज करने की मांग की है। परिजनों के विरोध के चलते अस्पताल परिसर में माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसे शांत करने के लिए पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा।

 

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जांच के लिए बनी कमेटी

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय मनकोटिया ने बताया कि मरीज को यथासंभव उपचार दिया गया था। लेकिन परिजनों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

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