शिमला। हिमाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार ने एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत संसाधनों के बेहतर उपयोग और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के 10 सरकारी महाविद्यालयों में नए दाखिलों पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है। 

75 से कम संख्या वाला कॉलेज होंगे बंद

ये वे कॉलेज हैं जहां छात्र संख्या 75 से भी कम रह गई है। सरकार का दावा है कि इस कदम से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं, अधिक विषय विकल्प और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण मिलेगा। जबकि विपक्ष और स्थानीय लोग इसे दूरदराज क्षेत्रों के छात्रों के लिए नई चुनौती के रूप में देख रहे हैं।

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10 कॉलेजों में नहीं होंगे नए दाखिले

उच्च शिक्षा विभाग की अधिसूचना के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 से राजकीय महाविद्यालय टिक्कर, भलेई, कुकुमसेरी, कुपवी, संधोल, मुल्थान, जैनगर, ननखरी, रोहाट और कोटली में किसी भी कक्षा में नए प्रवेश नहीं किए जाएंगे।

448 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं इन कॉलेजों में

इन 10 संस्थानों में वर्तमान में कुल 448 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। सबसे कम आठ-आठ विद्यार्थी टिक्कर और भलेई कॉलेज में नामांकित हैं। जबकि, रोहाट में 70 और जैनगर में 61 विद्यार्थी हैं।

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छात्रों को मिलेगा 5 हजार रुपये मासिक वजीफा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में पढ़ रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। उन्हें संबंधित जिला मुख्यालयों या निर्धारित कॉलेजों में समायोजित किया जाएगा। स्थानांतरण से होने वाली आर्थिक परेशानी को देखते हुए प्रथम और द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को 5,000 रुपये प्रतिमाह की विशेष वित्तीय सहायता भी दी जाएगी।

ऑनर्स विद रिसर्च के लिए नई शर्त

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत शुरू किए जा रहे चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम में "ऑनर्स विद रिसर्च" केवल उन्हीं विषयों में संचालित होगा जहां कम से कम दो मान्यता प्राप्त पीएचडी पर्यवेक्षक उपलब्ध होंगे। उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि इससे स्नातक स्तर पर शोध की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी।

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