शिमला। हिमाचल प्रदेश की मंडियों से लेकर सड़क किनारे लगने वाली अस्थायी सब्जी मंडियों तक अब एक नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने सभी फलों और सब्जियों पर एक प्रतिशत मार्केट फीस फिर से वसूलने का निर्णय लिया है। कृषि सचिव सी. पालरासू ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।

12 साल पुरानी व्यवस्था बहाल

करीब 12 साल पहले जिस फीस को महंगाई के दबाव में बंद किया गया था, अब वही व्यवस्था दोबारा बहाल कर दी गई है। इस फैसले का सीधा असर आढ़तियों, व्यापारियों और बाहरी राज्यों से फल-सब्जियां लाने वाले कारोबारियों पर पड़ेगा।

कांग्रेस सरकार ने ही बंद हटाई थी फीस

सरकार ने हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चर एंड हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2005 की धारा 64(2) के तहत 14 जनवरी 2014 की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसके जरिए फल एवं सब्जियों पर मार्केट फीस की वसूली रोकी गई थी।

 

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साल 2014 तक प्रदेश में सभी फलों और सब्जियों पर एक प्रतिशत मार्केट फीस ली जाती थी। उस समय देशभर में महंगाई बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए-2 सरकार के कहने पर कांग्रेस शासित राज्यों ने यह वसूली बंद कर दी थी।

 

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हिमाचल में सेब को छोड़कर बाकी सभी फलों और सब्जियों पर फीस हटाई गई थी। इसका असर यह हुआ कि शिमला, सोलन और कुल्लू को छोड़ अन्य सात जिलों की कृषि उपज विपणन समितियों (APMC) की आय लगभग खत्म हो गई।

40 से 50 करोड़ सालाना आय का अनुमान

सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से प्रदेश के 10 जिलों की APMC को सालाना 40 से 50 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होगी। यह राशि APMC और मार्केटिंग बोर्ड के पास रहेगी। दावा किया जा रहा है कि इस फंड से मंडियों का आधुनिकीकरण, ग्रामीण संपर्क सड़कों का निर्माण और आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जाएगा।

 

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आढ़तियों और बाहरी व्यापारियों पर असर

अब एक करोड़ रुपए का फल-सब्जी कारोबार करने वाले आढ़ती को एक लाख रुपए मार्केट फीस के रूप में जमा कराने होंगे। अभी तक सड़क किनारे लगने वाली मंडियों में सेब पर ही फीस ली जाती थी, लेकिन अब सभी फलों और सब्जियों पर यह लागू होगी।

प्रवेश शुल्क भी तय

सिर्फ स्थानीय व्यापारियों ही नहीं, बल्कि बाहरी राज्यों से हिमाचल में फल-सब्जियां लाने वालों को भी टोल बैरियर पर ही एक प्रतिशत फीस देनी होगी। यानी अब प्रदेश में प्रवेश के साथ ही यह शुल्क देय होगा।

 

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सरकार इसे आर्थिक मजबूती का कदम बता रही है, लेकिन सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या इसका असर अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ेगा? क्या फल-सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी या मंडी ढांचा वास्तव में मजबूत होगा यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

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