सराज (मंडी)। मात्र दो साल की उम्र में प्राकृतिक आपदा में अपने माता-पिता और दादी को खो चुकी मासूम नीतिका अब अकेली नहीं है। जिस बच्ची के सिर से एक भयावह रात में परिवार का साया उठ गया था, उसके लिए अब प्रशासन ही परिवार की तरह खड़ा है। सराज घाटी की इस मासूम नीतिका का दूसरा जन्मदिन थुनाग प्रशासन ने बेहद आत्मीय माहौल में मनाया। प्रशासनिक अधिकारियों ने न केवल उसके साथ केक काटा, बल्कि उसे उपहार और खिलौने भी दिए और उसके बेहतर भविष्य का भरोसा दिलाया।
14 अगस्त को जन्मी नीतिका के लिए इस बार का जन्मदिन खास रहा। थुनाग प्रशासन की ओर से तहसीलदार जितेंद्र कुमार शुक्रवार को सराज के शिकावरी गांव पहुंचे, जहां नीतिका अपनी बुआ के साथ रह रही है। उन्होंने मासूम के साथ जन्मदिन मनाया, केक खिलाया और उपहार भेंट किए। इस दौरान नीतिका की देखभाल और कुशलक्षेम की भी जानकारी ली गई।
परिवार को खो चुकी बच्ची का सहारा बना प्रशासन
नीतिका की कहानी जितनी दर्दनाक है, उतनी ही हौसला देने वाली भी। वर्ष 2025 में सराज क्षेत्र में आई भयानक प्राकृतिक आपदा ने कई परिवारों को तबाह कर दिया था। इसी त्रासदी में महज 10 माह की नीतिका ने अपने माता-पिता और दादी को खो दिया। 30 जून और 1 जुलाई 2025 की रात तलवाड़ा गांव में बादल फटने के बाद आई बाढ़ ने परिवार को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में नीतिका के पिता रमेश की मौत हो गई, जबकि उसकी मां राधा देवी और दादी पूर्णु देवी बाढ़ के तेज बहाव में बह गईं। परिवार में मासूम नीतिका ही ऐसी थी, जो इस भयावह त्रासदी के बाद जीवित बची।
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10 महीने की उम्र में सिर से उठा माता-पिता का साया
जिस उम्र में बच्चे को अपने माता-पिता की गोद और दुलार की जरूरत होती है, उस उम्र में नीतिका ने जिंदगी का सबसे बड़ा दुख झेला। महज 10 माह की उम्र में उसने अपने माता-पिता और दादी को खो दिया। आपदा के बाद नीतिका की देखभाल को लेकर प्रशासन ने पहल की। कई लोगों ने उसकी जिम्मेदारी लेने की इच्छा जताई, लेकिन बाद में उसकी बुआ उसे अपने घर ले आईं। अब नीतिका अपनी बुआ के साथ रह रही है और परिवार के प्यार के साथ अपना बचपन आगे बढ़ा रही है।
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सरकार ने दिया चाइल्ड ऑफ स्टेट का दर्जा
नीतिका की परिस्थितियों को देखते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने उसे 'चाइल्ड ऑफ स्टेट' का दर्जा दिया है। सरकार ने उसके वयस्क होने तक शिक्षा, पालन-पोषण और अन्य आवश्यक खर्च उठाने की घोषणा की है। इस फैसले ने नीतिका के भविष्य को लेकर परिवार और क्षेत्र के लोगों को बड़ी उम्मीद दी है। प्राकृतिक आपदा ने उससे उसका परिवार जरूर छीन लिया, लेकिन सरकार और प्रशासन ने उसके भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली है।
जन्मदिन पर फिर घर पहुंचा प्रशासन
नीतिका के दूसरे जन्मदिन पर थुनाग प्रशासन की मौजूदगी ने इस रिश्ते को और भावनात्मक बना दिया। तहसीलदार जितेंद्र कुमार स्वयं उसके पास पहुंचे और जन्मदिन की खुशियों में शामिल हुए। केक काटते समय शायद नीतिका को यह एहसास न हो कि उसके जीवन की यह छोटी-सी खुशी उसके पीछे छिपी कितनी बड़ी त्रासदी के बाद आई है, लेकिन प्रशासन का यह प्रयास उसके लिए आने वाले समय में एक मजबूत सहारे का संदेश जरूर है।
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कुथाह मेले में भी नीतिका बनी थी खास मेहमान
नीतिका के साथ प्रशासन का जुड़ाव सिर्फ उसके जन्मदिन तक सीमित नहीं है। करीब दो महीने पहले सराज में आयोजित जिला स्तरीय कुथाह मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी थुनाग प्रशासन ने नीतिका को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था। इतनी कम उम्र में उसे सम्मान देना अपने आप में खास पहल थी। इसके पीछे उद्देश्य सिर्फ उसे मंच देना नहीं, बल्कि समाज के सामने यह संदेश रखना था कि मुश्किल परिस्थितियों में भी जीवन को आगे बढ़ाने की उम्मीद कायम रहनी चाहिए।
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नीतिका की कहानी देती है उम्मीद का संदेश
एसडीएम थुनाग संजीत शर्मा के अनुसार, नीतिका की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो छोटी-छोटी परेशानियों में हिम्मत हार जाते हैं। परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, जीवन को आगे बढ़ाने और उम्मीद बनाए रखने का संदेश नीतिका की कहानी देती है।
