शिमला। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में भारत-चीन सीमा तक बन रही रणनीतिक सड़क के निर्माण में बाधा डालने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले पर हिमाचल हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिला प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने किन्नौर के उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्माण स्थल पर किसी भी तरह की रुकावट रोकने और निर्माण कंपनी को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।

 

हाईकोर्ट ने साफ किया है कि राष्ट्रीय महत्व के इस प्रोजेक्ट का काम बाधित नहीं होना चाहिए। प्रशासन को पहले स्थानीय लोगों से बातचीत कर विवाद सुलझाने के निर्देश दिए गए हैं। यदि इसके बावजूद कोई व्यक्ति निर्माण कार्य में बाधा डालता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।

पानी के टैंक को लेकर शुरू हुआ विवाद

यह पूरा विवाद सड़क निर्माण के दौरान मलबा नदी में गिरने से जलशक्ति विभाग के वाटर स्टोरेज टैंक को हुए नुकसान के बाद शुरू हुआ। टैंक क्षतिग्रस्त होने पर स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य का विरोध शुरू कर दिया।

 

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मामले की सुनवाई के दौरान निर्माण कंपनी ने कोर्ट को बताया कि विवाद खत्म करने और स्थानीय लोगों को सुविधा देने के लिए उसने अपनी संविदात्मक जिम्मेदारी से आगे बढ़कर सहयोग किया। कंपनी नए वाटर टैंक के लिए सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ डीसिल्टिंग चेंबर, डैम/हेड वीयर और करीब 2400 मीटर HDPE पाइपलाइन उपलब्ध कराने पर भी सहमत हुई। इसके अलावा पंप और DG सेट देने की भी बात कही गई।

ठेके को लेकर अड़ा विवाद

कंपनी की ओर से सहयोग के बावजूद कुछ स्थानीय लोग डीसिल्टिंग चेंबर का निर्माण अपनी पसंद के व्यक्ति को ठेका देने की मांग पर अड़ गए। इसी विवाद के चलते सड़क निर्माण का काम रोकने की स्थिति पैदा हो गई।

 

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कंपनी का कहना था कि उसने स्थानीय स्तर पर विवाद सुलझाने की कोशिश की और प्रशासन से निर्माण स्थल पर सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया, लेकिन स्थिति नहीं सुधरी। इसके बाद कंपनी को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।

DC-SP को सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश

हाईकोर्ट ने किन्नौर के DC और SP को निर्देश दिया है कि वे निर्माण स्थल पर किसी भी प्रकार की बाधा को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाएं। प्रशासन को पहले स्थानीय लोगों से बातचीत कर विवाद का समाधान निकालने को कहा गया है।

 

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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति बातचीत के बावजूद निर्माण कार्य में सहयोग नहीं करता और काम रोकने की कोशिश करता है, तो संबंधित लोगों के नाम और पूरा विवरण हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, ताकि उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा सके।

आदेश की अवहेलना पर अवमानना की कार्रवाई

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अदालत के निर्देशों का उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा। आदेश की अवहेलना होने पर अदालत की अवमानना की कार्रवाई हो सकती है और इसके दंडात्मक परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं।

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यह आदेश न्यायाधीश संदीप शर्मा ने बृज गोपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। कंपनी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के लिए अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में सामरिक सड़क का निर्माण कर रही है।

13 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी। किन्नौर की ऊंची पहाड़ियों में बन रही यह सड़क सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में निर्माण कार्य में किसी भी तरह की रुकावट को लेकर हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद अब जिला प्रशासन की भूमिका अहम हो गई है।

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