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September 12, 2026
टांडा मेडिकल कॉलेज में पार्किंग संचालकों की मनमानी खत्म! कोर्ट ने तय किए रेट; अब 5 और 10 रुपए लगेगा शुल्क
आयोग ने पार्किंग संचालकों की मनमानी पर लगाई लगाम, जुर्माना भी लगाया
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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के सबसे बड़े अस्पताल डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में पार्किंग शुल्क को लेकर लंबे समय से चल रही मनमानी पर अब लगाम लग गई है। जिला उपभोक्ता विवाद आयोग कांगड़ा स्थित धर्मशाला ने पार्किंग व्यवस्था को लेकर कड़ा फैसला सुनाते हुए मरीजों और उनके साथ अस्पताल पहुंचने वाले लोगों को बड़ी राहत दी है। आयोग ने न केवल निर्धारित दरों से अधिक शुल्क वसूलने पर कार्रवाई की है, बल्कि पार्किंग व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए कई अहम निर्देश भी जारी किए हैं।
आयोग के फैसले के बाद टांडा मेडिकल कॉलेज की पार्किंग में मनमाने तरीके से शुल्क वसूलना आसान नहीं होगा। 14 सितंबर 2026 से दोपहिया वाहनों से चार घंटे तक केवल 5 रुपये और उसके बाद 10 रुपये शुल्क लिया जा सकेगा। वहीं चारपहिया वाहनों के लिए चार घंटे तक 10 रुपये और इसके बाद अधिकतम 20 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
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टांडा मेडिकल कॉलेज में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में पार्किंग शुल्क को लेकर होने वाली परेशानी सीधे मरीजों और तीमारदारों की जेब पर असर डालती थी। आयोग के इस आदेश से अस्पताल आने वाले लोगों को अब स्पष्ट और निर्धारित दरों पर पार्किंग सुविधा मिलने की उम्मीद है।
आयोग ने मामले में टांडा के चिकित्सा अधीक्षक और प्रिंसिपल को 20 लाख रुपये जिला रेडक्रॉस सोसायटी कांगड़ा में जमा कराने के आदेश दिए हैं। इस राशि का इस्तेमाल यातायात नियमों के पालन, मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों में यातायात जागरूकता बढ़ाने और हेलमेट वितरण जैसे कार्यों के लिए किया जाएगा।
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पार्किंग ठेकेदार को भी आयोग ने राहत नहीं दी है। उसे दो लाख रुपये पुलिस अधीक्षक कांगड़ा के पास जमा कराने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा सभी विपक्षी पक्षों को संयुक्त रूप से 25 हजार रुपये जिला उपभोक्ता विधिक सहायता कोष में जमा कराने होंगे।
मामले में शिकायतकर्ता को भी आर्थिक राहत दी गई है। आयोग ने उसे 5 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के आदेश दिए हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय में राशि जमा नहीं कराने पर संबंधित पक्षों को 9 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।
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पूरा मामला ज्वालामुखी निवासी अभिषेक शर्मा की शिकायत से जुड़ा है। वह 10 जून 2026 को अपने उपचाराधीन रिश्तेदार के साथ टांडा अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने अपनी कार पार्किंग में खड़ी की। शिकायत के अनुसार वहां चारपहिया वाहन के लिए 20 रुपये प्रति घंटे की दर प्रदर्शित थी। दो घंटे से कम समय के लिए शुल्क 40 रुपये बनता था, लेकिन उनसे 50 रुपये वसूल किए गए। शिकायतकर्ता ने इसका विरोध किया तो कथित तौर पर उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया और वाहन रोकने की बात भी सामने आई। इसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा।
आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि 14 सितंबर 2021 को पार्किंग शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन प्रस्तावित दरों को विधिवत मंजूरी नहीं मिली थी। इसके बावजूद अधिक शुल्क वसूले जाने को आयोग ने गंभीरता से लिया। आयोग ने इसे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन, सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना और इसी आधार पर कड़ा फैसला सुनाया।
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आयोग ने पार्किंग व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए स्पष्ट दर-पट्ट लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पार्किंग संचालकों को इलेक्ट्रॉनिक रसीद जारी करनी होगी और प्रत्येक वाहन के प्रवेश तथा निकासी का समय दर्ज करना होगा। इससे भविष्य में निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली की शिकायतों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
आयोग ने संबंधित पक्षों को दो महीने के भीतर पार्किंग को पक्का करने, उचित रेखांकन करने और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। पार्किंग क्षेत्र के रास्ते में लगाए गए अवरोधकों को हटाने के आदेश दिए गए हैं, ताकि अस्पताल आने-जाने वाले लोगों को परेशानी न हो।
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फैसले में कुछ वाहनों को पार्किंग शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। रक्तदाताओं, लंगर सेवा से जुड़े वाहनों, एंबुलेंस और मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य से संबंधित वाहनों से पार्किंग शुल्क नहीं लिया जाएगा।
आयोग ने भविष्य में पार्किंग शुल्क बढ़ाने के लिए भी स्पष्ट प्रक्रिया तय की है। शुल्क बढ़ाने से पहले पार्किंग की क्षमता, उपयोग, आसपास लागू दरों और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का अध्ययन करना होगा। इसके बाद सक्षम स्तर से विधिवत मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।