मंडी/कुल्लू। हिंदू धर्म में शादी-विवाह को पूरे रीति-रिवाजों व मुहूर्त के अनुसार तय किया जाता है। मगर कई बार सात फेरों में बंधने के लिए जान जोखिम में डालना या मुहूर्त में बदलाव होने को भी विधि का विधान माना जाता है। ऐसा ही एक मामला प्रदेश के जिला मंडी से सामने आया है। जहां भारी बारिश और लैंडस्लाइड के कारण एक बारात रास्ते में फंसी जिसके बाद मुहूर्त बदल कर फेरे करवाए गए।

गाड़ियों में बिताई रात

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुल्लू जिले के सैंज से शुक्रवार रात रवाना हुई एक बारात को रास्ते में ऐसी आफत का सामना करना पड़ा, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

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दुल्हा अजय कुमार की बरात जब सरकाघाट की ओर दुल्हन के घर जा रही थी, तो पंडोह नाला के पास तेज़ बारिश के चलते भारी मलबा और पत्थर सड़क पर आ गिरे। नतीजतन, बारात वहीं रास्ते में फंस गई और बरातियों को पूरी रात अपने वाहनों में ही बितानी पड़ी।

बारात में थे 60 से ज्यादा लोग

रात करीब 11 बजे रवाना हुई इस बारात के साथ 60 से अधिक लोग शामिल थे। जैसे ही वाहन पंडोह नाले के पास पहुंचे, मूसलाधार बारिश के बाद आया मलबा उनकी राह रोक गया। लगातार बारिश और अंधेरे में मदद की कोई उम्मीद नज़र नहीं आई।

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ऐसे में दूल्हे समेत सभी बरातियों ने गाड़ियों में बैठकर ही रात काटी। सुबह होते ही प्रशासन और स्थानीय मशीनरी द्वारा सड़क बहाली का काम शुरू किया गया। करीब 9 बजे मार्ग को वाहनों के लिए खोला गया, जिसके बाद दूल्हा अजय कुमार और अन्य बराती सरकाघाट की ओर रवाना हो पाए।

दूसरा मुहूर्त देख लिए सात फेरे

हालांकि, निर्धारित मुहूर्त सुबह 7 बजे का था, जो बीत चुका था। ऐसे में दुल्हन पक्ष को इंतज़ार करना पड़ा और पुरोहित द्वारा नए मुहूर्त के अनुसार विवाह की रस्में दोपहर बाद संपन्न करवाई गईं। बारात आखिरकार शनिवार को साढ़े बारह बजे सरकाघाट पहुंची और दूल्हा-दुल्हन ने शाम चार बजे विवाह की सात फेरों की रस्में निभाईं।

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दूल्हे के एक रिश्तेदार श्याम ठाकुर ने बताया कि बरात सैंज से निकलते ही बारिश शुरू हो गई थी, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि रास्ते में ऐसी विपदा आ जाएगी। पंडोह पुलिस चौकी की टीम ने दूल्हे समेत कुछ नजदीकी परिजनों को सुरक्षित निकाला और कुल्लू की ओर से एक टैक्सी बुलाकर उसे दुल्हन के घर ज्वालापुर भेजा। ताकि शादी की रस्में तय समय पर पूरी हो सकें।

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