शिमला। हिमाचल प्रदेश के मरीजों के लिए PGI चंडीगढ़ में केशलैस इलाज की सुविधा अब खतरे में है। हिमकेयर योजना के तहत PGI ने 14 करोड़ 30 लाख रुपये की राशि का बिल हिमाचल सरकार को भेजा है, लेकिन महीनों से भुगतान नहीं हुआ। 

 

PGI गवर्निंग बॉडी की बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने इस मसले को गंभीर बताते हुए PGI प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि हिमाचल सरकार से तत्काल बातचीत कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी करवाई जाए।

 

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हर महीने होना था भुगतान, लेकिन सरकार ने नहीं निभाई शर्तें

25 फरवरी 2024 को PGI और हिमाचल सरकार के बीच एमओयू साइन हुआ था, जिसके तहत हिमकेयर लाभार्थियों को चंडीगढ़ में कैशलेस इलाज की सुविधा मिली। समझौते के अनुसार, इलाज के बिल मिलने के एक महीने के भीतर राज्य सरकार को भुगतान करना था, लेकिन अब तक 1478 मरीजों के बिलों का भुगतान नहीं हुआ है। इससे PGI पर न केवल आर्थिक दबाव बढ़ा है, बल्कि ऑडिट आपत्तियों का भी खतरा मंडरा रहा है।

 

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मरीजों पर पड़ेगा सीधा असर

PGI प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर भुगतान नहीं किया गया तो एमओयू रद्द किया जा सकता है। ऐसे में हिमाचल से आने वाले गरीब मरीजों को फिर से इलाज का पूरा खर्च खुद वहन करना पड़ेगा। डायरैक्टर प्रो. विवेक लाल और डिप्टी डॉयरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन पंकज राय के प्रयासों से यह योजना शुरू हुई थी, जिससे बड़ी संख्या में हिमाचल के मरीजों को राहत मिली थी।

 

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गवर्निंग बॉडी का निर्देश: प्राथमिकता से भुगतान करवाए सरकार

गवर्निंग बॉडी ने PGI प्रशासन से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि हिमाचल सरकार के साथ इस विषय को उच्च स्तर पर उठाएं और नियमित मासिक भुगतान सुनिश्चित करवाएं। बैठक में यह भी बताया गया कि अगर यही हाल रहा तो भविष्य में PGI कैशलैस इलाज के लिए हिमाचल से एमओयू समाप्त कर सकता है।

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