कुल्लू। देवभूमि हिमाचल को जब-जब बारिश और बाढ़ ने रुलाया, तब-तब देव समाज ने इसे देवताओं की चेतावनी बताया। अब आज नग्गर में देवी हिडिम्बा के आदेश पर एक बड़ी देव संसद आयोजित की गई। जिसमें देव संसद ने अपना अंतिम फैसला सुनाया।

देव संसद ने सुनाया अपना फैसला

देव संसद में हमारे सभी देवी-देवताओं ने एक स्वर में बताया है कि बाबा भोलेनाथ नाराज हो गए हैं। कुल्लू-नग्गर में जगती पट्ट पर आयोजित इस देव संसद से कई संदेश और कई आदेश निकले हैं: मगर सबसे बड़ा फैसला ये हुआ है कि हमारी देव शासन व्यवस्था ने PM नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को सिरे से नकार दिया है।

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229 देवी-देवताओं ने एक स्वर में बताया

कुल्लू-मंडी और लाहौल स्पीति के दूर-दराज इलाकों से नग्गर कैसल पधारे 229 देवी-देवताओं ने एक स्वर में बताया है कि शिव जी नाराज हो गए हैं और उनकी नाराजगी का कारण बिजली महादेव में बन रहा रोपवे प्रोजेक्ट है।

देवभूमि नहीं बनेगी पर्यटन स्थल

देव संसद ने साफ आदेश दिया है कि बिजली महादेव को नाराज मत करो, देवभूमि को पर्यटन स्थल मत बनाओ। देवताओं ने कहा कि अभी तो केवल एक ही लौटा पानी दिया है। अगर मानव की मनमानी ऐसे ही जारी रही तो भगवान रघुनाथ के चरण छूने को विवश होंगे।

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अभी आएगी और बड़ी आपदा

साथ ही देव संसद ने चेताया है कि यदि इंसान अपनी हदों में नहीं रहे तो आने वाला समय और खराब है। जिससे निपटने के लिए भी देवी-देवताओं ने समाधान भी सुझाए हैं। जिसमें एक जप करने को कहा गया है और ढालपुर में कुष्टु काहिका के भी आदेश देव संसद ने दिए हैं।

नाराज हो गए हैं महादेव

दिलचस्प बात यह है कि ये कोई पहला आदेश नहीं है। इससे पहले जब छोटी जगती रघुनाथपुर में आयोजित हुई थी, तब भी देवी-देवताओं ने कहा था आपदाओं से बचाव के लिए भगवान शिव को मनाया जाए।

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PM मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को नकारा

वहीं, इससे पहले जब नग्गर में स्की विलेज को लेकर बड़ी जगती हुई थी, तब भी देवताओं ने उस प्रोजेक्ट का विरोध किया था और नतीजा ये हुआ कि 1800 करोड़ का वो प्रोजेक्ट रद्द हो गया। ऐसे में अब एक बार फिर वही स्वर गूंजा है - फर्क बस इतना है कि इस बार देव संसद ने सीधे प्रधानमंत्री के सपने को नकारा है।

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