शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे (BPL) परिवारों के चयन के लिए नए नियम लागू किए हैं। ग्राम सभा की कार्यवाही की वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी और इसे पंचायत समिति के उपलब्ध धन के तहत किया जाएगा। पंचायत सचिव को इसकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण विकास सचिव राजेश शर्मा ने इन नए मानदंडों के आदेश जारी किए हैं।
कौन होंगे BPL सूची में शामिल?
1.बिना वयस्क सदस्य वाले परिवार– 18 वर्ष से कम आयु के अनाथ बच्चों वाले परिवार, जिनमें 59 वर्ष से अधिक के बुजुर्ग हैं और कोई भी वयस्क सदस्य (18-59 आयु वर्ग) नहीं है।
2. महिला मुखिया वाले परिवार– यदि परिवार की मुखिया महिला है और 18 से 59 वर्ष तक का कोई भी वयस्क सदस्य नहीं है।
3.दिव्यांगता वाले मुखिया – ऐसे परिवार जिनके मुखिया 50% या उससे अधिक दिव्यांगता से ग्रसित हैं।
4. गंभीर बीमारियों से पीड़ित परिवार– ऐसे परिवार जिनके कमाने वाले सदस्य कैंसर, अल्जाइमर, पार्किंसंस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया जैसी बीमारियों से स्थायी रूप से अक्षम हो चुके हैं।
5. मनरेगा श्रमिक – जिनके व्यस्क सदस्यों ने मनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार पूरा किया है।
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BPL सूची से कौन होगा बाहर?
1. जिनके पास पक्का मकान है।
2. जिनकी वार्षिक आय 50,000 रुपये से अधिक है (पहले यह सीमा 36,000 रुपये थी)।
3. जिनके पास एक हेक्टेयर से अधिक भूमि है।
4. जिनका कोई भी सदस्य सरकारी, अर्द्धसरकारी या निजी नौकरी में है।
BPL सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया
- इच्छुक परिवार हर साल 31 जनवरी तक ग्राम पंचायत को आवेदन दे सकते हैं।
- ग्राम सभा के समक्ष प्रस्ताव रखा जाएगा, जिसके बाद बीपीएल सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
- पूरी प्रक्रिया 15 मई तक पूरी कर ली जाएगी।
- यदि कोई बीपीएल परिवार का सदस्य अलग परिवार के रूप में नाम दर्ज कराना चाहता है, तो उसे अगले तीन वर्षों तक बीपीएल सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।
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सरकार ने बनाए है नए नियम
बता दें कि बीपीएल सूची के लिए सरकार द्वारा हाल ही में नए नियम बनाए गए है। जिसके आधार पर अब नई सूची जारी होनी है। सरकार का लक्ष्य बीपीएल सूची को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगतबनाना है, ताकि वास्तव में जरूरतमंद लोगों को ही इसका लाभ मिल सके। वीडियोग्राफी की व्यवस्था से भ्रष्टाचार और गलत नाम जोड़ने की संभावनाओं को कम किया जाएगा।
