शिमला। हिमाचल प्रदेश में चर्चित चेस्टर हिल जमीन विवाद में प्रदेश सरकार के निर्देशों के बाद उपायुक्त सोलन ने करीब 275 बीघा भूमि को राज्य के नाम दर्ज (वेस्ट) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही पूरे मामले की दोबारा गहन जांच भी प्रारंभ कर दी गई है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रहा मामला

दरअसल, यह मामला अब केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और उच्च अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर रहा है। खासतौर पर मुख्य सचिव संजय गुप्ता के उस आदेश को लेकर विवाद गहराया है, जिसमें उन्होंने पहले की जांच और कार्रवाई को रोकने के निर्देश दिए थे।

यह भी पढ़ें : हिमाचल की पंचायतें खर्च नहीं कर पाई 150 करोड़ : सरकार ने वापस मांगा पूरा पैसा

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की रोक लगाने का अधिकार केवल न्यायालय के पास होता है, जिससे यह आदेश अब सवालों के घेरे में आ गया है।

SDM स्तर पर हुई जांच में कई अनियमितताएं आईं सामने

दरअसल, इस प्रकरण की शुरुआत 2024 में एक शिकायत से हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि चेस्टर हिल प्रोजेक्ट के तहत जमीन को स्थानीय किसानों के नाम पर खरीदा गया, जबकि वास्तविक निवेश और नियंत्रण बाहरी लोगों और एक निजी डेवलपर के पास था।

यह भी पढ़ें : हिमाचल होटल में लग रह थी जिस्म की बोली : आधी रात को पहुंची पुलिस, पंजाब की 3 महिलाएं रेस्क्यू

एसडीएम स्तर पर हुई जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं- जैसे आय से अधिक संपत्ति, दिखावटी मालिकाना हक, और फ्लैट खरीदारों से मिली राशि का सीधा डेवलपर के खातों में जाना।

भूमि सुधार अधिनियम का उल्लंघन

जांच रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि भूमि सौदों में राज्य भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 का उल्लंघन हुआ है, जो गैर-कृषकों को जमीन खरीदने से रोकता है। इसके अलावा रेरा नियमों की अनदेखी और दस्तावेजों में कई प्रक्रियात्मक खामियां भी सामने आई हैं।

यह भी पढ़ें : हिमाचल पुलिस के हत्थे चढ़ा युवक, दो अलग-अलग तरह का ढेर सारा नशा बरामद

दिलचस्प बात यह है कि एसडीएम की रिपोर्ट में गड़बड़ियों की पुष्टि होने के बावजूद दिसंबर 2025 में कार्रवाई रोक दी गई थी, जिससे जांच प्रक्रिया लगभग ठप हो गई। अब सरकार ने उस आदेश को निरस्त कर फिर से कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसे डैमेज कंट्रोल के रूप में देखा जा रहा है।

हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे विनय

इस बीच नगर निगम सोलन द्वारा विवादित निर्माण को गिराने के आदेश भी दिए जा चुके हैं। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता विनय शर्मा ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय जांच की सिफारिश भी चर्चा में है, जिसमें बेनामी निवेश की आशंका जताई गई है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल में बिजली सब्सिडी का नया सिस्टम : अब घर बैठे होगा राशन कार्ड से मीटर लिंक

हालांकि, मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी वैध प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया और संबंधित मामलों में निर्णय लेने का अधिकार जिला प्रशासन के पास ही है।

डीसी सोलन की जांच रिपोर्ट पर टिकीं नजरें

अब इस पूरे मामले में आगे की दिशा डीसी सोलन की जांच रिपोर्ट तय करेगी, जिससे यह साफ हो सकेगा कि आखिर इस कथित घोटाले में जिम्मेदारी किसकी है और क्या बड़े स्तर पर कार्रवाई होगी।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें