पांवटा साहिब (सिरमौर)। आज अंतरराष्ट्रीय वन दिवस दिवस है। इस खास  दिन पर हिमाचल प्रदेश के वन विभाग ने इंसानों और हाथियों के संघर्ष को रोकने के लिए देश में पहली बार एक अनोखा प्रयोग किया है। शुक्रवार से शुरू हुए एक अभियान के तहत अब मधुमक्खियों की मदद से दुनिया के सबसे विशाल प्राणी, यानी हाथियों की सुरक्षा की जाएगी।

सिरमौर में होती है हाथियों की घुसपैठ

असल में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की दून घाटी में आए दिन जंगली हाथियों की घुसपैठ हो जाती है। इससे कई बार मानव-हाथियों के बीच संघर्ष की स्थिति बन जाती है, जिससे इंसानों और हाथियों दोनों को नुकसान होता है। स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना भी एक बड़ी चुनौती बन गई है।

ऐसे सुरक्षा देंगी मधुमक्खियां

हाथियों को मधुमक्खियों से डर लगता है और मधुमक्खियों की भनभनाहट उन्हें मानव बस्तियों से दूर रखने में प्रभावी साबित हो सकती है। इसी सोच के तहत उत्तराखंड सीमा से सटे सिंबलवाड़ा रिजर्व सेंचुरी के प्रवेश द्वारों पर मधुमक्खियों के छत्तों की सुरक्षा बाड़ बनाने की योजना बनाई जा रही है।

 

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डीएफओ ऐश्वर्या राज की पहल

पांवटा साहिब के डीएफओ ऐश्वर्या राज की अध्यक्षता में बैहराल ब्लॉक में हाथी संरक्षण एवं प्रबंधन को लेकर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में स्थानीय समुदाय को हाथियों से सुरक्षा और उनके व्यवहार को समझने के तरीके बताए गए। मधुमक्खी पालन विशेषज्ञ अशोक कुमार ने बताया कि मधुमक्खियों के डंक की आवाज से हाथी भाग जाते हैं, और इसका उपयोग हाथियों को आबादी से दूर रखने के लिए किया जा सकता है।

 

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राजाजी नेशनल पार्क से आते हैं हाथी

उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क से जंगली हाथी यमुना नदी पार कर हिमाचल के सिरमौर जिले के सिंबलवाड़ा क्षेत्र तक पहुंचते हैं। यहां ट्रेंच या सुरक्षा दीवारें न होने के कारण हाथी खेतों में घुस आते हैं, जिससे जान-माल का नुकसान होता है। बीते समय में ऐसी ही घटनाओं में एक महिला और एक भेड़पालक की मौत हो चुकी है।

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हाथी संरक्षण की दिशा में एक नया अध्याय

इस पहल से वन विभाग ने न केवल हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया है, बल्कि स्थानीय समुदाय को भी सक्रिय भागीदार बनाया है। वहीं, वन विभाग की यह पहल लोगों को मधुमक्खी पालन की तरफ भी और अधिक बढ़ावा देगी।

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