शिमला। हिमाचल प्रदेश वर्तमान में अपने सबसे कठिन आर्थिक दौर से गुजर रहा है। एक तरफ प्रदेश सरकार वित्तीय संकट का हवाला देकर खर्चों में कटौती की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी उपक्रमों (PSUs) के भीतर चल रही 'वित्तीय सेंधमारी' ने राज्य की कमर तोड़ दी है। ताजा मामला हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HPSAMB) का है, जहां ऑडिट रिपोर्ट 2023-24 ने एक ऐसे भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का खुलासा किया है, जिसने विभाग की साख पर बट्टा लगा दिया है।

आर्थिक संकट के बीच करोड़ों के खेल का खुलासा

प्रदेश की कमजोर होती आर्थिक स्थिति को लेकर लगातार चर्चा चल रही है और विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकारी संस्थानों में वित्तीय गड़बड़ियां भी आर्थिक दबाव बढ़ाने का बड़ा कारण बन रही हैं। इसी कड़ी में वर्ष 2023-24 की ऑडिट रिपोर्ट ने हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के खातों में भारी विसंगतियों का पर्दाफाश किया है।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: सगे मामा ने कर दी भांजे की ह*त्या, 24 घंटे में हुआ अरेस्ट; वजह जान चौंक गई पुलिस

अधिशासी अभियंताओं के पास 95 करोड़ लंबित

राज्य लेखा परीक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार बोर्ड द्वारा विभिन्न निर्माण कार्यों और योजनाओं के लिए जारी की गई 110 करोड़ रुपये से अधिक की अग्रिम राशि का वर्षों बाद भी निपटान नहीं हो पाया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि अकेले अधिशासी अभियंताओं के पास ही करीब 95 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबित पाई गई।

वित्तीय नियमों की जमकर उड़ाई गई धज्जियां

ऑडिट जांच में सामने आया कि कई मामलों में विकास कार्यों के नाम पर वित्तीय नियमों का पालन नहीं किया गया। मंडी समितियों से निर्माण कार्यों के लिए राशि तो ली गई] लेकिन उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि बोर्ड ने समितियों की संपत्तियों को अपनी संपत्ति के रूप में वर्क इन प्रोग्रेस दिखाकर वित्तीय स्थिति को वास्तविकता से बेहतर दर्शाने की कोशिश की। विभिन्न डिपॉजिट कार्यों के खातों में करीब 49.25 करोड़ रुपये का अंतर पाया गया] जिसने लेखा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल को केंद्र से मिलेगा खास फाइनेंशियल पैकेज ! सीएम सुक्खू ने दिल्ली में वित्त मंत्री से मांगा सहयोग

फर्जी भुगतान और कागजी कार्यों पर खर्च का संदेह

ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार कई भुगतान ऐसे कार्यों के लिए किए गए] जिनकी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई या जिनमें तकनीकी स्वीकृति और आवश्यक दस्तावेज अधूरे पाए गए। बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए कार्य आवंटित किए जाने और बजट से अधिक भुगतान होने के संकेत भी जांच में सामने आए हैं। कुछ मामलों में यह आशंका भी जताई गई है कि कागजों में पूर्ण दिखाए गए कार्य धरातल पर मौजूद ही नहीं हैं] जिससे फर्जी बिलों के जरिए सरकारी धन के दुरुपयोग की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

यह भी पढ़ें : HRTC की नई पहल : बसों में शुरू होगी कुरियर सेवा, 3 रुपये प्रति KM रहेगा किराया

अनुदान राशि और खातों में भी गड़बड़ी

केंद्र और राज्य सरकार से प्राप्त लगभग 74.45 करोड़ रुपये की अनुदान राशि को बैलेंस शीट में शेष दर्शाया गया, जबकि वास्तविकता में यह राशि मंडी समितियों के विकास कार्यों में खर्च हो चुकी थी। कर्मचारियों के सीपीएफ खातों और बैंक बैलेंस में भी अंतर पाया गया है।

बोर्ड चेयरमैन ने दिए जांच के निर्देश

कृषि विपणन बोर्ड के चेयरमैन Kuldeep Singh Pathania ने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई खामियों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत जांच करवाई जाएगी। रिकॉर्ड प्रबंधन और लेखा वर्गीकरण में पाई गई कमियों को तुरंत दुरुस्त करने के निर्देश दिए जाएंगे और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: दर्जी के बेटे ने रचा इतिहास, पास की सबसे कठिन परीक्षा; मृ.त मां का पूरा किया सपना

किसानों से जुड़े संस्थान की साख पर सवाल

कृषि विपणन बोर्ड का मुख्य उद्देश्य किसानों को बेहतर बाजार सुविधा और मंडी ढांचा उपलब्ध कराना है, लेकिन करोड़ों रुपये के इस कथित वित्तीय खेल ने संस्थान की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों तक सीमित रह जाएगा। प्रदेश की आर्थिक सेहत सुधारने के लिए वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही अब सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें