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March 2, 2026

हिमाचल को केंद्र से मिलेगा खास फाइनेंशियल पैकेज ! सीएम सुक्खू ने दिल्ली में वित्त मंत्री से मांगा सहयोग

सीएम सुक्खू ने वित्त मंत्री को बताई हिमाचल की आर्थिक बदहाली की तस्वीर

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CM-Sukhu-delhi

शिमला। जब पहाड़ों की अर्थव्यवस्था डगमगाती है, तो उसका असर सीधे विकास की रफ्तार पर पड़ता है। इसी चिंता को लेकर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिले और उनके समक्ष प्रदेश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति का मुद्दा मजबूती से उठाया। इस दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने  साफ शब्दों में कहा कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट आरडीजी बंद होने के बाद हिमाचल प्रदेश पर भारी वित्तीय दबाव पैदा हो गया है, जिसे प्रदेश की पहाड़ी अर्थव्यवस्था लंबे समय तक झेलने की स्थिति में नहीं है।

केंद्र के सामने रखा हिमाचल की आर्थिक स्थिति का सच

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में राज्य के राजस्व घाटे को संतुलित करना हिमाचल सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों की आर्थिक संरचना मजबूत और औद्योगिक आधार बड़ा है, उनकी तुलना हिमाचल जैसे छोटे और पहाड़ी राज्य से करना व्यावहारिक नहीं है। सुक्खू ने जोर देकर कहा कि आरडीजी बंद होने से प्रदेश की वित्तीय सेहत पर सीधा असर पड़ा है और विकास योजनाओं के संचालन तक पर संकट खड़ा हो सकता है। उनका कहना था कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था पर्यटन, कृषि और सीमित संसाधनों पर आधारित है, इसलिए अतिरिक्त केंद्रीय सहयोग बेहद जरूरी है।

 

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केंद्र से मांगा विशेष वित्तीय पैकेज

वित्त वर्ष 2026-27 के संभावित राजस्व घाटे को देखते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री से हिमाचल प्रदेश के लिए विशेष केंद्रीय सहायता के तहत एक खास फाइनेंशियल पैकेज देने की मांग की। साथ ही उन्होंने पहाड़ी राज्यों की आर्थिक स्थिति का अलग से आकलन करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा।

हिमाचल नहीं झेल सकता आर्थिक दबाव

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बड़े राज्य राजस्व घाटे के दबाव को संभाल सकते हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश के लिए यह स्थिति गंभीर वित्तीय संकट का रूप ले सकती है। उन्होंने केंद्र से विशेष वित्तीय पैकेज देने की मांग करते हुए कहा कि यह सहायता प्रदेश के विकास और वित्तीय स्थिरता के लिए अनिवार्य है। सीएम सुक्खू ने कहा कि सभी राज्यों को एक ही पैमाने पर आंकना सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए पहाड़ी राज्यों के लिए अलग आर्थिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई।

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खर्च नियंत्रण के बावजूद नहीं घटा घाटा

मुख्यमंत्री ने बैठक में यह भी बताया कि राज्य सरकार ने पिछले वर्षों में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। ऑफ.बजट उधारी से बचने, अतिरिक्त सेस के माध्यम से राजस्व बढ़ाने और सब्सिडी संतुलन जैसे प्रयासों के बावजूद जीएसटी व्यवस्था के कारण हुए नुकसान की भरपाई नहीं हो पाई। उन्होंने केंद्र से पहाड़ी राज्यों की आर्थिक परिस्थितियों का अलग से अध्ययन करने और सुधारात्मक सुझाव देने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का भी आग्रह किया।

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केंद्र ने दिया सकारात्मक संकेत

बैठक के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हिमाचल सरकार की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री के साथ उनके प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इस मुलाकात को राजनीतिक हलकों में हिमाचल की आर्थिक चुनौतियों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने की बड़ी पहल माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि केंद्र सरकार प्रदेश को वित्तीय राहत देने के लिए कितना बड़ा कदम उठाती है।

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