हमीरपुर। उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध सिद्धपीठ बाबा बालकनाथ मंदिर दियोटसिद्ध में आज एक अटूट आस्था और श्रद्धा का ऐसा दृश्य देखने को मिला। इस नजारे ने वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।
बहन के लिए भाई ने मांगी मन्नत
पंजाब से जुड़े एक श्रद्धालु ने अपनी बहन की मन्नत पूरी होने पर शाहतलाई से दियोटसिद्ध तक लगभग चार किलोमीटर की कठिन दंडवत यात्रा पूरी कर बाबा बालकनाथ के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की। तेज धूप, कठिन चढ़ाई और शारीरिक थकान भी उनकी आस्था के आगे फीकी पड़ गई।
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पुत्र प्राप्ति की कामना ले पहुंचे थे दरबार
जानकारी के अनुसार, पंजाब के जालंधर की रहने वाली अमनदीप कौर और उनके पति सिमरनजीत सिंह वर्तमान में इटली में निवास करते हैं। दंपती के परिवार में पहले से दो बेटियां थीं और वे पुत्र प्राप्ति की कामना लेकर बाबा बालकनाथ के चरणों में पहुंचे थे।
इच्छा पूरी होने का था भरोसा
उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ बाबा से अपनी मनोकामना पूर्ण करने की प्रार्थना की थी और विश्वास जताया था कि बाबा की कृपा से उनकी इच्छा अवश्य पूरी होगी। पिछले वर्ष चैत्र मास के पावन मेलों के दौरान अमनदीप कौर अपने परिवार सहित दियोटसिद्ध पहुंचे थे।
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पवित्र गुफा में लिया था संकल्प
उसी समय उनके भाई प्रिंस कुमार ने बाबा की पवित्र गुफा में माथा टेककर एक विशेष संकल्प लिया। उन्होंने मन ही मन प्रण किया कि अगर उनकी बहन की गोद पुत्र रत्न से भर जाएगी तो वे शाहतलाई से दियोटसिद्ध तक दंडवत करते हुए बाबा के दरबार में पहुंचेंगे और अपनी श्रद्धा अर्पित करेंगे।
इटली में बहन ने बेटे को दिया जन्म
समय बीतने के साथ बाबा की कृपा से अमनदीप कौर ने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया। परिवार ने इसे बाबा बालकनाथ का आशीर्वाद माना। मन्नत पूरी होने के बाद प्रिंस कुमार ने अपने संकल्प को निभाने का निर्णय लिया और शनिवार को शाहतलाई से दियोटसिद्ध तक लगभग चार किलोमीटर की दंडवत यात्रा पूरी कर बाबा के चरणों में शीश नवाया।
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कठिन राह भी नहीं डिगा सकी श्रद्धा
दंडवत यात्रा सामान्य यात्रा की तुलना में कई गुना अधिक कठिन मानी जाती है। प्रत्येक दंडवत के बाद श्रद्धालु वहीं से आगे बढ़ते हुए दोबारा लेटकर यात्रा जारी रखते हैं। ऐसे में कई घंटे लग जाते हैं और शरीर को अत्यधिक कष्ट सहना पड़ता है।
लोगों ने बढ़ाया उत्साह
इसके बावजूद प्रिंस कुमार पूरे रास्ते बाबा के नाम का स्मरण करते हुए आगे बढ़ते रहे। उनके इस समर्पण को देखकर अन्य श्रद्धालु भी भाव-विभोर हो गए और अनेक लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं देकर उनका उत्साह बढ़ाया।
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हर वर्ष मेलों में पहुंचता है परिवार
दर्शन के बाद प्रिंस कुमार ने बताया कि उनके परिवार की बाबा बालकनाथ में वर्षों पुरानी गहरी आस्था है। वे प्रत्येक वर्ष चैत्र मास के मेलों में दियोटसिद्ध पहुंचकर बाबा के दर्शन करते हैं। उनका कहना था कि बाबा के आशीर्वाद से उनकी बहन के घर पुत्र का जन्म हुआ और इसी कारण उन्होंने अपनी मन्नत पूरी करने के लिए यह कठिन दंडवत यात्रा की। उन्होंने कहा कि बाबा पर सच्चे मन से किया गया विश्वास कभी व्यर्थ नहीं जाता और उनकी कृपा हमेशा अपने भक्तों पर बनी रहती है।
परिवार ने बढ़ाया हौसला
इस पूरी यात्रा के दौरान प्रिंस कुमार के परिवार के सदस्य भी उनके साथ मौजूद रहे। पलविंद्र सिंह, सोनू, संदीप राणा, इंद्रजीत सिंह और बॉबी ने पूरे समय उनका हौसला बढ़ाया तथा हर कदम पर उनका सहयोग किया। बाबा बालकनाथ मंदिर परिसर में पहुंचने के बाद पूरे परिवार ने विधिवत पूजा-अर्चना कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने जीवन में सुख-समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की कामना की।
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बाबा के प्रति लोगों की आस्था गहरी
दियोटसिद्ध में शनिवार को देखने को मिला यह दृश्य एक बार फिर इस बात का प्रमाण बन गया कि बाबा बालकनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था आज भी उतनी ही गहरी है। दूर-दराज़ से आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर बाबा के दरबार पहुंचते हैं और मन्नत पूरी होने पर अलग-अलग तरीकों से अपनी श्रद्धा व्यक्त कर बाबा का आभार प्रकट करते हैं।
