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August 11, 2026

हिमाचल हाईकोर्ट के सख्त आदेश, कंपनी को चार सप्ताह में रंजना को दे 2.23 करोड़ का मुआवजा

अवैज्ञानिक कटान से मकान गिरने पर NHAI और कंपनी को हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

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himachal highcourt

शिमला। हिमाचल प्रदेश में सड़क निर्माण के दौरान गलत तरीके से की गई कटिंग के चलते  बहुमंजिला इमारतों को हुए नुकसान पर हिमाचल हाईकोर्ट ने सख्त आदेश पारित किए हैं। हिमाचल हाईकोर्ट ने एनएचएआई और कंपनी को दो करोड़ से भी अधिक का मुआवजा देने के सख्त आदेश दिए हैं।

 

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी के फोरलेन निर्माण के दौरान पहाड़ी कटान में कथित लापरवाही का मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचने के बाद अब निर्माण एजेंसियों के लिए बड़ा झटका बन गया है। शिमला बाईपास एनएच-5 पर चमियाना में फोरलेन निर्माण के दौरान पहाड़ी को अवैज्ञानिक तरीके से काटने से बहुमंजिला मकान को हुए नुकसान पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

चार सप्ताह के भीतर अदा करनी होगी राशि

अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और निर्माण कंपनी गावर शिमला हाईवे प्राइवेट लिमिटेड को प्रभावित रंजना देवी को 2 करोड़ 23 लाख 55 हजार 924 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। दोनों को मुआवजे की 50-50 प्रतिशत राशि चार सप्ताह के भीतर अदा करनी होगी।

 

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एक साल से ज्यादा समय तक नहीं मिला मुआवजा

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान इस बात पर नाराजगी जताई कि प्रशासन और लोक निर्माण विभाग ने जुलाई 2025 में ही संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन कर लिया था। इसके बावजूद प्रभावित परिवार को लंबे समय तक मुआवजा नहीं दिया गया। अदालत ने इस देरी को गंभीरता से लेते हुए संबंधित एजेंसियों को अब चार सप्ताह के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है।

फोरलेन निर्माण के दौरान ढह गई चार मंजिला इमारत

मामले में सामने आया कि शिमला बाईपास के निर्माण के दौरान पहाड़ी की कटिंग के बाद क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी और रंजना देवी की बहुमंजिला इमारत बुरी तरह प्रभावित हुई। स्थिति इतनी गंभीर हुई कि चार मंजिला मकान देखते ही देखते ढह गया। इसके बाद आसपास की अन्य इमारतों पर भी खतरा मंडराने लगा। अदालत के समक्ष रखी गई रिपोर्टों में निर्माण कार्य और क्षेत्र में पैदा हुई असुरक्षित परिस्थितियों को गंभीरता से लिया गया।

 

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NHAI ठेकेदार का हवाला देकर नहीं बच सकता- हाईकोर्ट

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण केवल यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता कि निर्माण कार्य ठेकेदार कंपनी के माध्यम से कराया जा रहा है। अदालत ने माना कि जिस परियोजना की निगरानी NHAI के अधीन हो, वहां निर्माण के दौरान होने वाली लापरवाही की जिम्मेदारी से संबंधित प्राधिकरण पूरी तरह अलग नहीं हो सकता।

 

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अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि हिमाचल प्रदेश में बड़े निर्माण कार्यों से आर्थिक लाभ कमाने वाली कंपनियों की जिम्मेदारी केवल परियोजना पूरा करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। निर्माण के कारण स्थानीय लोगों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचता है तो प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा और नुकसान की भरपाई भी जरूरी है।

कई और इमारतों पर खतरा

मामला एक मकान तक सीमित नहीं है। तहसीलदार (ग्रामीण) की रिपोर्ट में सामने आया है कि फोरलेन निर्माण के बाद पैदा हुई स्थिति से चंदा देवी समेत छह अन्य लोगों की इमारतें भी भूस्खलन के खतरे की जद में आ गई हैं। चंदा देवी का करीब साढ़े तीन मंजिला मकान रंजना देवी की ढही हुई इमारत के ठीक पीछे स्थित है और इसे भी पूरी तरह असुरक्षित घोषित किया गया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चंदा देवी के मकान को हुए नुकसान का आकलन निर्धारित प्रक्रिया के तहत जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रभावित परिवार को हुए नुकसान का उचित मूल्यांकन किया जा सके।

 

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फोरलेन विकास के बीच सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

चमियाना का यह मामला शिमला में चल रहे बड़े सड़क विकास कार्यों के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को भी सामने लाता है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क चौड़ीकरण के लिए पहाड़ों की कटिंग के दौरान वैज्ञानिक तकनीक, सुरक्षा उपायों और ड्रेनेज व्यवस्था की अनदेखी भारी पड़ सकती है। एक ओर जहां फोरलेन परियोजनाओं से बेहतर कनेक्टिविटी की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर निर्माण से प्रभावित स्थानीय लोगों की संपत्तियों और सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

23 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

यह मामला चंदा देवी की ओर से भेजे गए पत्र के आधार पर शुरू हुई जनहित याचिका से सामने आया था। हाईकोर्ट ने अब प्रभावित पक्षों को राहत देने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि निर्धारित चार सप्ताह की अवधि में रंजना देवी को मुआवजे की राशि का भुगतान होता है या नहीं और अन्य प्रभावित इमारतों को लेकर प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।

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