शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए 10 बड़े बदलाव करने का निर्णय लिया है, जो आगामी जून से शुरू होने वाले कॉलेजों के नए शैक्षणिक सत्र से लागू होंगे। इन बदलावों का उद्देश्य छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना और उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
छात्रों को मिलेगी निशुल्क शिक्षा
राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि हर कॉलेज में पांच विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। इन विद्यार्थियों का चयन कॉलेज द्वारा किया जाएगा, जिसमें उनकी वार्षिक आय, कक्षा 12 के अंक, और अन्य मानकों को ध्यान में रखा जाएगा।
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बी-वॉक डिग्री में नए विषयों की शुरुआत
बी-वॉक (बैचलर ऑफ वोकेशनल) डिग्री में नए व्यावसायिक विषयों की शुरुआत की जाएगी, ताकि छात्रों को रोजगार में सहायता मिल सके। इसके अतिरिक्त, बीएड डिग्री भी कॉलेजों में शुरू की जाएगी, जो कुछ कॉलेजों में पहले साल में शुरू की जाएगी, क्योंकि इसके लिए अलग से शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे।
प्लेसमेंट सेल का गठन
प्रदेश सरकार ने कॉलेजों में प्लेसमेंट सेल बनाने का निर्णय लिया है, जो औद्योगिक घरानों से संपर्क कर कैंपस प्लेसमेंट आयोजित करेंगे। इसका उद्देश्य छात्रों को नौकरी के अवसर प्रदान करना है।
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कॉलेजों का युक्तिकरण और कम छात्रों वाले कॉलेजों का मर्ज
सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि कम छात्रों वाले कॉलेजों को मर्ज किया जाएगा। 100 से कम छात्रों वाले कॉलेजों का युक्तिकरण किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान की जा सके। इसके अलावा, जिन विषयों में नाममात्र के दाखिले होते हैं, उन्हें दूसरे कॉलेज में शिफ्ट किया जाएगा।
उच्च शिक्षा में समन्वय और राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन
उच्च और तकनीकी शिक्षा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
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अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
- कॉलेजों में चार वर्षीय एकीकृत बीएड कोर्स (इंटीग्रेटेड बीएड) शुरू होगा।
- कॉलेज शिक्षकों की एसीआर का फॉर्मेट बदला जाएगा।
- कॉलेज प्रधानाचार्यों की शक्तियां बढ़ाई जाएंगी।
- नए व्यावसायिक कोर्स शुरू किए जाएंगे।
इस सुधार योजना का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करना और छात्रों को बेहतर रोजगार और शिक्षा के अवसर प्रदान करना है।
