चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में बादल फटने के बाद अचानक आए सैलाब ने इलाके में मुश्किलें बढ़ा दीं। ग्राम पंचायत बलोठ के 84 चला में बादल फटने से उफनते पानी ने लोहे के पुल को बहा दिया, जबकि श्रद्धालुओं के आने-जाने वाला पैदल रास्ता भी क्षतिग्रस्त हो गया।
बादल फटने से मची तबाही
इस दौरान मां भगवती खुंढी वाली के दर्शन के लिए जा रहे करीब 40 से 50 श्रद्धालु रास्ते में फंस गए। गनीमत रही कि इस घटना में किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है। स्थानीय लोगों ने समय रहते मोर्चा संभाला और फंसे हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
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रास्ते में फंस गए श्रद्धालु
पूर्व प्रधान पवन शर्मा ने बताया कि उन्हें मोबाइल के माध्यम से इलाके में बादल फटने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही वह स्थानीय लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। वहां पहुंचने पर देखा कि करीब 40 से 50 श्रद्धालु सैलाब के कारण रास्ते में फंस गए थे।
अचानक आए तेज बहाव के कारण लोहे का पुल पूरी तरह बह चुका था और पैदल रास्ता भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो गया था।
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लकड़ी की पुलिया बनाकर बचाया रास्ता
श्रद्धालुओं को फंसा देखकर स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया। लोगों ने लकड़ी की अस्थायी पुलिया तैयार की और उसकी मदद से एक-एक कर सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित दूसरी तरफ पहुंचाया।
स्थानीय लोगों ने की मदद
इस दौरान सैलाब का पानी काफी तेज बहाव के साथ बह रहा था। इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने सावधानी से श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया। समय रहते मदद मिलने से बड़ा हादसा टल गया।
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लोहे का पुल बहा, पैदल रास्ते को भी नुकसान
बादल फटने के बाद आए सैलाब से लोहे का पुल पूरी तरह बह गया है। इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले पैदल रास्ते को भी काफी नुकसान पहुंचा है। रास्ता क्षतिग्रस्त होने से आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं के लिए परेशानी बढ़ सकती है।
पूर्व प्रधान पवन शर्मा ने प्रशासन से मांग की है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए क्षतिग्रस्त पुल और पैदल रास्ते को जल्द से जल्द बहाल किया जाए।
मंगलवार को बढ़ सकती है श्रद्धालुओं की भीड़
इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां भगवती खुंढी वाली मंदिर के दर्शन के लिए इसी रास्ते से पहुंच रहे हैं। मंगलवार को ज्येष्ठ मंगलवार के अवसर पर श्रद्धालुओं के डल झील में पवित्र स्नान करने की भी परंपरा बताई जाती है।
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35 से 40 किलोमीटर की दूरी पैदल
ऐसे में आने वाले दिनों में यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु करीब 35 से 40 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करते हैं। रास्ते और पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रशासन के सामने अब श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने की चुनौती है।
लोगों की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द मौके का निरीक्षण कर वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था करने और क्षतिग्रस्त पुल को बहाल करने की मांग की है, ताकि धार्मिक यात्रा पर आने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
