चंबा। हिमाचल प्रदेश में जीवन कठिन होने के कारण अक्सर लोग अपनी नौकरी को मजबूरी कहते हैं, लेकिन चंबा जिले से सामने आई यह कहानी उस सोच को तोड़ती है। यहां एक HRTC चालक ने अपने पेशे को सिर्फ रोज़गार नहीं, बल्कि अपनी पहचान बना लिया। उसने ऐसा कुछ कर दिखाया है, जिसे देखकर लोग हैरान भी हैं और भावुक भी। इस चालक ने अपने घर की छत पर हूबहू सरकारी बस खड़ी कर दी है । लकड़ी और टिन से बनी ऐसी बस, जिसे दूर से देखकर कोई भी असली समझ ले।

HRTC चालक ने छत पर बनाई बस

चंबा जिले के ककरोटी क्षेत्र में रहने वाले HRTC चालक श्रीधर ने अपने घर की छत पर लकड़ी और टिन से एक पूरी सरकारी बस तैयार की है। इस बस को HRTC के असली रंग, डिजाइन और पहचान चिन्हों के साथ सजाया गया है। बस में सीटें लगी हैं, आगे ड्राइवर की जगह स्टीयरिंग व्हील लगाया गया है और सामने से देखने पर यह किसी असली बस से अलग नहीं लगती।

 

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धर्मशाला-भरमौर रूट का नाम भी लिखा

सबसे खास बात यह है कि इस बस पर  धर्मशाला-भरमौर रूट का नाम भी लिखा गया है, जिस पर श्रीधर ड्यूटी देते हैं यही वजह है कि जो भी इस बस को देखता है, कुछ पल के लिए ठिठक जाता है।

लकड़ी, टिन से बनी  है ये सरकारी बस

इस अनोखी बस को तैयार करने के लिए श्रीधर ने एक मैकेनिक की मदद ली। ढांचा पूरी तरह उनकी अपनी सोच पर बनाया गया। इसके बाद उन्होंने इसे बाकायदा पेंट करवाया, नंबर प्लेट जैसा बोर्ड लगाया और HRTC की पहचान से जुड़ी हर छोटी चीज को इसमें शामिल किया।

 

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श्रीधर बताते हैं कि यह बस उन्होंने किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि अपने दिल के लगाव से बनाई है। साल 2016 में HRTC में भर्ती होने के बाद से उनका ज्यादातर जीवन बसों और सड़कों के बीच ही बीता है। धीरे-धीरे यह नौकरी उनकी आदत नहीं, बल्कि उनका जुनून बन गई।

बस में ही बिताते हैं ज्यादातर समय

श्रीधर कहते हैं कि जब वे घर पर होते हैं, तो ज्यादातर समय इसी बस में बिताते हैं। यहीं बैठते हैं, यहीं खाना खाते हैं और कई बार यहीं दोस्तों से बातचीत करते हैं। उनके लिए यह बस कोई ढांचा नहीं, बल्कि उनके संघर्ष, मेहनत और पहचान का प्रतीक है।

उनके मुताबिक सरकारी बस चलाना मेरे लिए सिर्फ ड्यूटी नहीं है। यही मेरा जीवन है। मैंने जो कुछ सीखा, जो कुछ कमाया, सब इसी से जुड़ा है। इसलिए सोचा, क्यों न इसे अपने घर का हिस्सा ही बना दूं।

 

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आकर्षण का केंद्र बना ड्राइवर का घर

अब श्रीधर का घर पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी लोग इस बस को देखने पहुंच रहे हैं। कई लोग इसके साथ फोटो खिंचवाते हैं, कुछ हैरानी जताते हैं तो कुछ श्रीधर की सोच और मेहनत को सलाम करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहली बार किसी को अपनी नौकरी से इतना जुड़ा देखा है कि उसने उसे कला का रूप दे दिया।

 

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युवाओं के लिए बन रही मिसाल

इस अनोखी पहल को लोग केवल शौक नहीं मान रहे, बल्कि एक संदेश के रूप में देख रहे हैं  कि अगर इंसान अपने काम से प्रेम करे, तो वही काम उसकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। श्रीधर की यह बस अब सिर्फ एक निर्माण नहीं रही, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा बनती जा रही है।

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