शिमला। पंजाब में वायरल हो रही स्ट्रेंजर पार्टनर और ब्लाइंड फोल्ड पार्टियों की दुनिया अब सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रह गई है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम ने इस ट्रेंड को नई रफ्तार दी है, जहां अनजान युवक-युवतियां सीक्रेट लोकेशन पर पार्टियों में जुटते हैं।
ब्लाइंड फोल्ड पार्टी की वीडियो वायरल
सबसे गंभीर बात यह है कि इन पार्टियों का विस्तार अब हिमाचल के हिल एरिया तक होने का दावा किया जा रहा है, जिसने सुरक्षा, संस्कृति और कानून व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
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क्या हैं ब्लाइंड फोल्ड और स्ट्रेंजर पार्टनर पार्टियां?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिख रहा है कि इन पार्टियों में शामिल युवक-युवतियां एक-दूसरे से पूरी तरह अनजान होते हैं। बातचीत से पहले दोनों की आंखों पर पट्टी बांध दी जाती है, जिसे ‘ब्लाइंड फोल्ड कन्वर्सेशन’ कहा जा रहा है। आयोजकों का दावा है कि इससे लोग बिना पहचान के खुलकर बातचीत कर पाते हैं। बाद में यह ग्रुप पार्टी से लेकर पर्सनल पार्टी तक में बदल जाती है।
मेंबरशिप, ऑनलाइन बुकिंग और पूरी तरह सीक्रेट सिस्टम
इन पार्टियों में शामिल होने के लिए पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है। इसके लिए बाकायदा मेंबरशिप फीस ली जा रही है। नॉर्मल ग्रुप पार्टी के लिए 499 रुपए और पर्सनल पार्टी ग्रुप के लिए 999 रुपए का पैकेज बताया जा रहा है। पार्टी की लोकेशन, समय और जगह की जानकारी रजिस्ट्रेशन के बाद ही दी जाती है। मेंबर के अलावा किसी बाहरी व्यक्ति को कोई सूचना नहीं दी जाती।
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युवाओं को ऐसे किया जा रहा अट्रैक्ट
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन पार्टियों के नाम से वीडियो डाले जा रहे हैं, जिनमें झूमते युवक-युवतियां, म्यूजिक और ‘फ्रीडम’ का माहौल दिखाया जाता है। एक युवती के जरिए वीडियो में पार्टी के पैकेज, वॉट्सएप नंबर और ग्रुप जॉइन करने की जानकारी दी जाती है। यही वीडियो युवाओं को तेजी से आकर्षित कर रहे हैं।
कहां होती हैं ये पार्टियां?
जानकारी के अनुसार नॉर्मल ग्रुप पार्टियां पंजाब के शहरों और चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला जैसे इलाकों में होती हैं। वहीं पर्सनल पार्टियों को ज्यादा ‘एक्सक्लूसिव’ बताते हुए हिल एरिया में आयोजित किया जाता है। वीडियो और बातचीत में दावा किया गया है कि ऐसी पार्टियां शिमला और मनाली जैसे पर्यटन स्थलों के आसपास कराई जाती हैं।
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वीकेंड पर होती है पार्टी
इन पार्टियों का आयोजन ज्यादातर शुक्रवार, शनिवार और रविवार को किया जाता है। आयोजक हर हफ्ते अलग-अलग लोकेशन तय करते हैं। पर्सनल पार्टी को ज्यादा गोपनीय बताया जाता है, जहां सीमित लोगों को ही बुलाया जाता है।
हिमाचल पर क्या होगा इसका असर?
इस ट्रेंड का हिमाचल से जुड़ना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। पर्यटन स्थलों पर ऐसी सीक्रेट पार्टियों से नशाखोरी, अपराध, महिलाओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है। स्थानीय संस्कृति और सामाजिक माहौल पर भी इसका प्रभाव पड़ने की आशंका है। अगर समय रहते प्रशासन और पुलिस ने इस तरह की गतिविधियों पर नजर नहीं रखी, तो पहाड़ी पर्यटन स्थलों को पार्टी डेस्टिनेशन में बदलने का यह ट्रेंड हिमाचल के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
