धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के उन युवाओं के लिए राहत भरी खबर है जो लंबे समय से सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा कर रहे थे। प्रदेश की सुक्खू सरकार ने पटवारी के 645 पदों को भरने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद यह मामला राज्य चयन आयोग को भेजा गया है। वहीं आयोग ने इस भर्ती प्रक्रिया को शुरू भी कर दिया है। यह बड़ा निर्णय विधानसभा के तपोवन स्थित परिसर में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने एक सवाल के जवाब में साझा किया।

पटवारियों की भारी कमी

राजस्व मंत्री ने बताया कि प्रदेश में पटवारियों की भारी कमी है और कई सर्किल बिना नियमित कर्मचारियों के काम कर रहे हैं। स्थिति को संभालने के लिए सरकार अस्थायी व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्त पटवारियों की सेवाएं ले रही है, लेकिन नई भर्ती के बाद राजस्व विभाग की कार्यक्षमता में सुधार आएगा।

 

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समय पर राजस्व कार्य पूरा न करने पर कार्रवाई

नेगी ने बताया कि राजस्व कार्यों के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए स्पष्ट समय सीमा निर्धारित की गई है। यदि कोई अधिकारी निर्धारित समय में काम नहीं करता है, तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है और विभागीय कार्रवाई भी होगी। उन्होंने पूर्व भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में समय रहते पटवारियों की भर्ती नहीं की गई, जिसके कारण आज यह गंभीर कमी देखने को मिल रही है।

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विधायक के क्षेत्र में कई पद खाली

विधायक इंद्र दत्त लखनपाल ने अपने क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि बड़सर में 43 पटवार सर्किलों में 10 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं और निशानदेही के कई मामले वर्षों से लंबित हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन तहसीलदारों को सेवा विस्तार दिया गया है, उनके कार्यालयों में भ्रष्टाचार की शिकायतें बढ़ी हैं।

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मनमानी फीस पर सख्त रुख

तहसील कार्यालयों में डाक्यूमेंट राइटरों द्वारा तय शुल्क से अधिक पैसा वसूले जाने की शिकायत पर राजस्व मंत्री ने कहा कि यदि ऐसे किसी मामले का विवरण विधायक लिखित में दें, तो सरकार तुरंत जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि डाक्यूमेंट राइटरों के शुल्क तय किए गए हैं, अगर कोई उससे अधिक वसूली करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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राजस्व विभाग में और बड़े सुधार जल्द

मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में विभाग में कई अहम बदलाव किए गए हैं और आने वाले दिनों में और बड़े सुधार लागू किए जाएंगे। लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए हर महीने राजस्व अदालतें लगाई जा रही हैं, जिससे जनता को समय पर राहत मिल सके।

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