शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव का पहला चरण सिर्फ मतदान नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति लोगों की गहरी आस्था और पहाड़ की जीवटता का उत्सव बन गया। प्रदेशभर में मंगलवार सुबह से ही मतदान केंद्रों पर ऐसा उत्साह देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि पहाड़ों में लोकतंत्र सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोगों की भावना है।
कहीं 100 साल की बुजुर्ग महिला मतदान केंद्र पहुंची, तो कहीं 105 वर्षीय दादी पैदल चलकर वोट डालने पहुंच गईं। भीषण गर्मी, उम्र और शारीरिक परेशानियां भी मतदाताओं के हौसले को रोक नहीं सकीं।
बुजुर्गों का तालियों से किया स्वागत
ऊना से लेकर शिमला, रामपुर और जुब्बल तक मतदान केंद्रों पर बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं का उत्साह चर्चा का विषय बना रहा। जिला ऊना की सुनेहरा पंचायत में 85 वर्षीय ज्ञान कौर, 83 वर्षीय सतनाम जी, 81 वर्षीय कृष्णा देवी और 86 वर्षीय सुखदेव शर्मा मतदान केंद्र पहुंचे और अपने मताधिकार का प्रयोग किया। लोगों ने इन बुजुर्गों का तालियों से स्वागत किया।
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दिव्यांग मतदाता भी पहुंचे वोद देने
दिव्यांग मतदाता निर्मला ने भी कठिन परिस्थितियों के बावजूद मतदान कर लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। हालांकि कई जगह व्यवस्थाओं की कमी भी सामने आई। सुनेहरा पंचायत के मतदान केंद्र पर बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर तक उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ी।
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90 से 105 साल तक के मतदाताओं ने दिखाई मिसाल
अम्ब खंड की लडोली पंचायत में 90 वर्षीय राम चंद और 86 वर्षीय किशन लाल वोट डालने पहुंचे। वहीं रामपुर बुशहर के गोपालपुर पंचायत में 90 वर्षीय शवीर दास अपनी पत्नी के साथ मतदान केंद्र पहुंचे और वोट डाला। इसी पंचायत में 100 वर्षीय बिंदु देवी ने भी मतदान कर युवाओं को संदेश दिया कि लोकतंत्र में हर वोट की अहमियत होती है।
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जुब्बल की झगटान पंचायत में सबसे ज्यादा चर्चा 105 वर्षीय गोखी देवी की रही, जो पैदल चलकर मतदान केंद्र पहुंचीं। उनकी तस्वीरें और वीडियो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं। ठियोग में 100 वर्षीय सूरत राम ने मतदान कर लोगों को प्रेरित किया, जबकि बरोट पंचायत में 86 वर्षीय चेत्री देवी ने भी मतदान में हिस्सा लिया।
गांव की सरकार चुनने को लेकर दिखा जोश
प्रदेशभर में सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं। कई जगह लोग पारंपरिक वेशभूषा में मतदान केंद्र पहुंचे। ग्रामीणों का कहना था कि पंचायत स्तर पर सही प्रतिनिधि चुनना गांव के विकास के लिए बेहद जरूरी है, इसलिए हर नागरिक को मतदान जरूर करना चाहिए।
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लोगों ने प्रशासन से मांग की कि आगामी चरणों में बुजुर्ग, बीमार और दिव्यांग मतदाताओं के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि उन्हें मतदान के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। पहाड़ों में लोकतंत्र के इस उत्साह ने एक बार फिर दिखा दिया कि हिमाचल में चुनाव सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी और विश्वास का सबसे बड़ा पर्व है।
