शिमला। हिमाचल प्रदेश में अब व्यावसायिक उपभोक्ताओं को बिजली के लिए ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी। प्रदेश सरकार ने व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बिजली सेस लगाने का बड़ा फैसला लिया है। ऊर्जा विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार अब 10 श्रेणियों के व्यावसायिक उपभोक्ताओं से बिजली खपत पर एक रुपये प्रति यूनिट अतिरिक्त सेस वसूला जाएगा। सरकार ने यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू भी कर दिया है।
7.39 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंचेगी दर
फिलहाल व्यावसायिक उपभोक्ताओं को 6.20 रुपये से 6.39 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही थी। लेकिन नए सेस के बाद यह दर बढ़कर 7.39 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे प्रदेश के राजस्व में बढ़ोतरी होगी और विकास कार्यों के लिए संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।
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किन संस्थानों पर पड़ेगा असर
यह अतिरिक्त सेस उन सभी संस्थानों पर लागू होगा जो व्यावसायिक श्रेणी में बिजली का उपयोग कर रहे हैं। इनमें बिजनेस हाउस, निजी कार्यालय, निजी अस्पताल, पेट्रोल पंप, होटल, मोटल, निजी नर्सिंग होम, निजी रिसर्च संस्थान, कोचिंग सेंटर, शॉपिंग मॉल और मल्टीप्लेक्स शामिल हैं।
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बताया जा रहा है कि इस फैसले से प्रदेश के दो लाख से ज्यादा उपभोक्ता प्रभावित होंगे। हालांकि घरेलू बिजली दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इसका असर अप्रत्यक्ष रूप से आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। होटल, अस्पताल और कोचिंग संस्थानों का खर्च बढ़ने से सेवाएं महंगी हो सकती हैं।
पहले से ही लग रहे हैं दो तरह के सेस
प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं से पहले ही दो प्रकार के सेस वसूले जा रहे हैं। पहला मिल्क सेस है, जिसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं से प्रति यूनिट 10 पैसे लिए जाते हैं। दूसरा पर्यावरण सेस है, जिसकी दर उपभोक्ता श्रेणी के हिसाब से 2 पैसे से लेकर 6 रुपये तक तय है।
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पड़ोसी राज्यों में क्या हैं बिजली दरें
पंजाब में 500 यूनिट तक बिजली की दर 6.10 रुपये और उससे ऊपर 7.10 रुपये प्रति यूनिट है। हरियाणा में 500 यूनिट तक 6.50 रुपये और 1000 यूनिट से ऊपर 7.50 रुपये प्रति यूनिट बिजली मिलती है। वहीं जम्मू-कश्मीर में 500 यूनिट तक अधिकतम 5.40 रुपये और उससे ऊपर 5.85 रुपये प्रति यूनिट दर लागू है।
व्यापारियों में बढ़ी चिंता
सरकार के फैसले के बाद होटल कारोबारियों, निजी अस्पताल संचालकों और व्यापारिक संगठनों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि पहले ही संचालन लागत बढ़ रही थी, अब बिजली दरों में बढ़ोतरी से सीधा असर कारोबार और आम उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ेगा।
