#अपराध
May 15, 2026
हिमाचल में 4 हजार से ज्यादा लोग लापता : महिलाओं-बच्चों का नहीं कोई सुराग; बढ़ रही संख्या
394 बच्चों को पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर लिया है
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में महिलाओं की बढ़ती गुमशुदगी अब कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक चिंता का बड़ा विषय बनती जा रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो NCRB की वर्ष 2024 की रिपोर्ट ने राज्य की स्थिति को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, बीते वर्ष प्रदेश में कुल 4,208 लोग लापता दर्ज किए गए- जिनमें सबसे बड़ी संख्या महिलाओं की रही। आंकड़ों के मुताबिक 2,489 महिलाएं गुमशुदा हुईं हैं।
पुलिस अब तक कुल मामलों में केवल 2,177 लोगों को ही ट्रेस कर सकी है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि 2,031 लोग अभी भी लापता हैं। प्रदेश की कुल रिकवरी दर 51.7 प्रतिशत दर्ज की गई- जो राष्ट्रीय औसत 54.7 प्रतिशत से भी कम है।
रिपोर्ट यह संकेत देती है कि महिलाओं के लापता होने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उन्हें सुरक्षित ढूंढ पाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कई कारण इस स्थिति को प्रभावित कर रहे हैं। जैसे कि-
पर्यटन राज्य होने के कारण हिमाचल में हर साल लाखों पर्यटक और बाहरी लोग आते हैं। इससे लोगों की गतिविधियों पर निगरानी रखना और ट्रैकिंग करना और अधिक कठिन हो जाता है।
हालांकि, बच्चों की सुरक्षा को लेकर हिमाचल के लिए राहत भरी तस्वीर भी सामने आई है। वर्ष 2024 में प्रदेश में 482 बच्चे लापता हुए- जिनमें 100 लड़के और 382 लड़कियां शामिल थीं। इनमें से 394 बच्चों को पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर लिया। बच्चों की कुल रिकवरी दर 81.7 प्रतिशत रही- जो राष्ट्रीय औसत 67.8 प्रतिशत से काफी बेहतर मानी जा रही है।
सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि लड़कियों की रिकवरी दर 86.4 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसे हिमाचल पुलिस की त्वरित कार्रवाई, साइबर ट्रैकिंग और जिला स्तर पर बेहतर समन्वय का नतीजा माना जा रहा है।
देशभर में पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में गुमशुदगी के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। मगर बच्चों की रिकवरी के मामले में हिमाचल बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल रहा। इसके बावजूद महिलाओं और वयस्कों की कम रिकवरी दर ने पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं की गुमशुदगी सिर्फ अपराध का विषय नहीं- बल्कि तेजी से बदलते सामाजिक ढांचे से जुड़ी गंभीर चुनौती भी है। परिवारों में संवाद की कमी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती निर्भरता और साइबर अपराधों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
ऐसे में केवल पुलिस कार्रवाई काफी नहीं होगी- बल्कि समाज स्तर पर जागरूकता, महिला सुरक्षा तंत्र और डिजिटल निगरानी को भी मजबूत करना जरूरी हो गया है।
यह रिपोर्ट हिमाचल की दो अलग तस्वीरें सामने लाती है। एक ओर बच्चों की सुरक्षा में बेहतर पुलिसिंग से भरोसा बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं की बढ़ती गुमशुदगी और कम रिकवरी दर भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी बनकर उभरी है।