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May 16, 2026

देवता की मनाही के बाद किन्नर कैलाश यात्रा पर लग सकती है रोक, गुर के माध्यम से जारी किया आदेश

किन्नर कैलाश यात्रा पर फैसला बाकी

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kinner kailash

किन्नौर। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर की प्रसिद्ध किन्नर कैलाश यात्रा इस साल संशय में घिर गई है। स्थानीय देव आस्था और धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए यात्रा पर रोक लगाने की मांग उठी है। मामले को लेकर किन्नौर प्रशासन को ज्ञापन भी सौंप दिया गया है, जिसके बाद पूरे इलाके में चर्चा तेज हो गई है।

देव आदेश के बाद बढ़ी चिंता

जानकारी के अनुसार पोवारी गांव के कुलदेवता परका शंकर ने अपने गुर के माध्यम से देव आदेश जारी किया है कि भविष्य में किन्नर कैलाश यात्रा को बंद कर दिया जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यात्रा के कारण क्षेत्र की पवित्रता और प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। जनजातीय क्षेत्रों में देव आदेश को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में इस फैसले ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है।

 

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प्रशासन करेगा उच्च स्तरीय बैठक

किन्नौर के डीसी ने कहा है कि प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रहा है। जल्द ही इस विषय पर उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी और कैबिनेट मंत्री से भी सलाह ली जाएगी। प्रशासन का कहना है कि स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं और देव आस्था को किसी भी तरह आहत नहीं होने दिया जाएगा। फिलहाल यात्रा होगी या नहीं, इसका फैसला देव कारदारों और प्रशासन के बीच होने वाली चर्चा के बाद ही तय माना जा रहा है।

 

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बेहद कठिन मानी जाती है यात्रा

किन्नर कैलाश हिमाचल के सबसे कठिन धार्मिक ट्रेक में से एक माना जाता है। यहां स्थित करीब 79 फीट ऊंचा प्राकृतिक शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है। यात्रा का रास्ता बेहद दुर्गम है और करीब 14 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है। हर साल अगस्त महीने में प्रशासन इस यात्रा का आयोजन करता है, जो लगभग 10 दिनों तक चलती है।

 

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आस्था बनाम पर्यटन की बहस तेज

यात्रा पर रोक की मांग के बाद अब आस्था और पर्यटन के बीच बहस भी तेज हो गई है। एक ओर स्थानीय लोग देव आदेश को सर्वोच्च मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े लोग यात्रा बंद होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर असर की बात कह रहे हैं।

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