कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के में अवैध पेड़ कटान का एक और मामला सामने आया है। वन विभाग के कार्यालय के करीब कटान की घटना सामने आने के बाद विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कटे पेड़ों को कब्जे में लेने और आरोपियों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही है।
कार्यालय के पास कटान, वनकाटुओं का सुराग नहीं
मिली जानकारी के अनुसार, कांगड़ा जिला के तहत आते इंदौरा में भदरोआ वन परिक्षेत्र कार्यालय से करीब 700 मीटर की दूरी पर अंदरून डमटाल क्षेत्र में खैर के कई हरे पेड़ों को काटे जाने की सूचना मिली है। मौके पर करीब 7 से 8 खैर के पेड़ कटे हुए पाए गए हैं। बताया जा रहा है कि अंदरून डमटाल में जिस स्थान पर पेड़ काटे गए हैं, वह भदरोआ वन परिक्षेत्र कार्यालय से ज्यादा दूर नहीं है। इसके बावजूद कटान करने वाले लोग मौके से निकल गए।
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घटना सामने आने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कटे हुए पेड़ों की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू की। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि पेड़ों को कब काटा गया और कटान में कौन लोग शामिल थे। खैर की लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी को लेकर इंदौरा क्षेत्र पहले भी चर्चा में रहा है।
लगातार सामने आ रहे अवैध कटान के मामले
इंदौरा और आसपास के वन क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से अवैध खैर कटान के कई मामले सामने आने का दावा किया जा रहा है। इंदपुर क्षेत्र में अवैध रूप से काटे गए करीब 40 खैर के मौच्छे बरामद किए जाने की बात भी सामने आई थी। इसके अलावा भदरोआ और टूटा तालाब इलाके में खैर की लकड़ी लेकर जा रहे वाहनों को पकड़े जाने के मामले भी सामने आ चुके हैं।
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अलग-अलग स्थानों पर पेड़ों की अवैध कटाई की घटनाओं ने वन विभाग के सामने चुनौती बढ़ा दी है। इन घटनाओं के चलते स्थानीय स्तर पर यह आशंका जताई जा रही है कि क्षेत्र में खैर की लकड़ी के अवैध कारोबार से जुड़े लोग सक्रिय हो सकते हैं। हालांकि, किसी संगठित नेटवर्क या किसी व्यक्ति की संलिप्तता की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
ग्रामीणों ने निगरानी व्यवस्था पर उठाए सवाल
क्षेत्र में लगातार पेड़ कटने की घटनाओं को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगलों में नियमित गश्त और निगरानी होने के बावजूद हरे पेड़ों की कटाई होना चिंता का विषय है। ग्रामीणों के मुताबिक, रात के समय जंगलों में कटान की गतिविधियां होने की आशंका रहती है।
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उनका कहना है कि वन विभाग को संवेदनशील इलाकों में निगरानी और गश्त बढ़ाने के साथ-साथ सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि वन विभाग की जिम्मेदारी वाले क्षेत्रों में कटान करने वाले लोग कैसे पहुंच रहे हैं और कार्रवाई से पहले लकड़ी लेकर निकलने में कैसे सफल हो जाते हैं।
संरक्षण को लेकर भी उठ रहे सवाल
खैर के पेड़ों की अवैध कटाई को लेकर ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि आखिर वन काटुओं को रोकने के लिए विभाग की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है। ग्रामीणों ने संवेदनशील वन क्षेत्रों में नियमित पेट्रोलिंग, रात के समय निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
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हालांकि, ग्रामीणों की ओर से लगाए जा रहे संरक्षण या मिलीभगत संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विभाग का कहना है कि दोषियों की पहचान होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने कहा- निगरानी बढ़ाई जाएगी
भदरोआ के रेंज ऑफिसर अब्दुल हमीद ने कहा कि अवैध कटान के मामलों को विभाग गंभीरता से ले रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है और कटान में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, बीओ संजय कुमार ने बताया कि अंदरून डमटाल में खैर के कुछ पेड़ काटे जाने की सूचना मिली है। विभागीय टीम मौके पर जाकर कटे पेड़ों को कब्जे में लेने की कार्रवाई कर रही है।
