हमीरपुर। जल शक्ति विभाग की सरकारी पाइपें पानी पहुंचाने के लिए थीं… लेकिन हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर में जनाब, ये तो घर की रेलिंग में ही पहुंच गईं! यहाँ तरोपका गांव में एक मकान की रेलिंग में लगी कुछ पाइपों पर सरकारी मोहर मिलने के बाद शिकायत हुई और फिर विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है। विजिलेंस टीम ने रेलिंग से पाइपों के हिस्से काटकर सैंपल कब्जे में लिए हैं।
शिकायत के बाद घर पहुंची विजिलेंस टीम
मामला सरकारी संपत्ति के कथित दुरुपयोग से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, घर में लगी पाइपें वास्तव में जल शक्ति विभाग की सरकारी सप्लाई की ही हैं या नहीं और उनका इस्तेमाल किस परिस्थिति में हुआ, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। मामले की शिकायत हिमाचल प्रदेश अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य राजीव राणा की ओर से की गई थी।
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शिकायत में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2022 में जल शक्ति विभाग के स्टोर से कनेक्शन के लिए जारी की गई पाइपों का कथित तौर पर मकान की रेलिंग बनाने में इस्तेमाल किया गया। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने मौके का निरीक्षण किया। टीम ने रेलिंग में लगी पाइपों को देखा और उन पर मौजूद निशानों तथा मोहर की जांच की। मौके से लिए गए सैंपल अब विभागीय स्तर पर जांच के लिए भेजे गए हैं।
महिला कर्मचारी बोली 2021 में खरीदा मकान
विजिलेंस की कार्रवाई के दौरान जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों को भी मौके पर बुलाया गया। टीम ने रेलिंग में लगी पाइपों के कुछ हिस्सों को काटकर नमूने के रूप में सुरक्षित किया। इन सैंपलों को आगे की जांच के लिए जल शक्ति विभाग को सौंप दिया गया है। विभागीय जांच में यह देखा जाएगा कि पाइपों का स्रोत क्या है और क्या उनका संबंध विभाग की किसी सरकारी सप्लाई से है। जांच पूरी होने तक परिवार को पाइपों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
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मकान में रहने वाली महिला कर्मचारी ने पूछताछ के दौरान बताया कि उसने यह मकान वर्ष 2021 में खरीदा था। महिला के अनुसार, जब उसने मकान खरीदा, उस समय घर में जल जीवन मिशन के तहत सरकारी नल का कनेक्शन लगा हुआ था। उसका कहना है कि बाद में पीवीसी पाइप के जरिए नया कनेक्शन डाला गया और पुरानी पाइप को निकाल दिया गया था। ऐसे में रेलिंग में लगी पाइपें उसी पुराने कनेक्शन से संबंधित हैं या नहीं, यह भी जांच का एक अहम पहलू है।
कार्रवाई के दौरान पहुंचे कांग्रेस से जुड़े दो नेता
जांच के दौरान विजिलेंस टीम ने मकान के पूर्व मालिक को भी मौके पर बुलाया। पूर्व मालिक ने बताया कि घर में पानी के कनेक्शन के लिए पाइप लगाई गई थी। हालांकि, उस समय कुल कितनी पाइप इस्तेमाल हुई थी, इसकी सटीक जानकारी उसे याद नहीं होने की बात सामने आई। अब विजिलेंस और विभागीय जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि रेलिंग में लगी पाइपों का इस्तेमाल कब और किस उद्देश्य से किया गया था।
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विजिलेंस की कार्रवाई के दौरान नादौन विधानसभा क्षेत्र से जुड़े कांग्रेस के दो नेता भी मौके पर पहुंचे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें से एक व्यक्ति को महिला कर्मचारी का करीबी रिश्तेदार बताया गया है। महिला कर्मचारी वर्तमान में सुजानपुर में तैनात है। इससे पहले वह हमीरपुर मंडल के अंतर्गत कार्यरत थी। मौके पर कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी को लेकर भी चर्चा रही, हालांकि पाइपों से जुड़े मामले में उनकी किसी भूमिका की पुष्टि जांच के स्तर पर नहीं हुई है।
जल शक्ति विभाग ने भी जांच शुरू की
जल शक्ति विभाग मंडल हमीरपुर के अधिशासी अभियंता राजीव सहगल के अनुसार, विजिलेंस से मामले की जानकारी मिलने के बाद विभाग की ओर से एक कनिष्ठ अभियंता को मौके पर भेजा गया था। उन्होंने बताया कि विजिलेंस टीम द्वारा लिए गए पाइपों के सैंपल विभाग को सौंपे गए हैं। अब इनकी जांच और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
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शिकायतकर्ता राजीव राणा का कहना है कि उन्होंने सरकारी संपत्ति के कथित दुरुपयोग को लेकर विजिलेंस में शिकायत दी थी। उनका दावा है कि मकान की रेलिंग में ऐसी पाइपें मिली हैं, जिन पर सरकारी मोहर मौजूद है। उन्होंने मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने और यदि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
जांच रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल इस मामले में विजिलेंस की ओर से सैंपल लिए जा चुके हैं और उन्हें जल शक्ति विभाग को सौंपा गया है। पाइपों पर सरकारी मोहर होने की बात जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन केवल मोहर मिलने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सरकारी पाइपों का ही अवैध इस्तेमाल हुआ है।
अब विभागीय रिकॉर्ड, पाइपों के सैंपल और मकान से जुड़े पुराने कनेक्शन की जानकारी का मिलान किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रेलिंग में लगी पाइपें सरकारी आपूर्ति से संबंधित थीं या नहीं और यदि थीं, तो उनका इस्तेमाल किस प्रक्रिया के तहत हुआ।
