चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के एक गांव में चल रहे एक अवैध क्लीनिक से जुड़ा मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। चुराह उपमंडल के रेटा गांव में बिना लाइसेंस सर्जरी करने वाले कथित डॉक्टर के पास से बरामद दवाइयों का सेंपल भी जांच में फेल पाया गया है।

गलत दवाई देता था फर्जी डॉक्टर 

जांच में पाया गया है कि डॉक्टर द्वारा ये दवाई एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन बच्चों को दी जाती थी। इस खुलासे ने न सिर्फ मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि दवा सप्लाई चेन को भी जांच के घेरे में ला दिया है।

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जांच में खुली पोल

क्लीनिक संचालक ने पूछताछ में बताया कि यह दवा उसने चंबा के एक थोक दवा विक्रेता से खरीदी थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित विक्रेता को नोटिस जारी कर उस फार्मेसी कंपनी का नाम मांगा, जहां से यह दवा सप्लाई की गई थी।

दिल्ली से खरीदता था दवाइयां

जांच में दिल्ली स्थित एक दवा कंपनी का नाम सामने आया है, जिसे भी विभाग ने कारण बताओ नोटिस भेज दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने कंपनी से उस बैच की दवा खरीदने वाले सभी केमिस्टों की सूची तलब की है- ताकि बाजार में मौजूद संदिग्ध स्टॉक का पता लगाया जा सके। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जिस बैच का सैंपल फेल हुआ है, उसकी बिक्री तत्काल प्रभाव से रोक दी जाए।

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क्लीनिक में पड़ा था छापा

गौरतलब है कि 12 जनवरी को ड्रग इंस्पेक्टर लवली ठाकुर के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रेटा गांव में इस अवैध क्लीनिक पर छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान पश्चिम बंगाल निवासी बिलास विश्वास नामक व्यक्ति को सर्जरी करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया था।

बवासीर के मरीज की सर्जरी

उस वक्त झोलाछाप डॉक्टर एक मरीज की बवासीर की सर्जरी कर रहा था। मौके से भारी मात्रा में दवाइयों का जखीरा भी बरामद हुआ- जिनके भंडारण और बिक्री से संबंधित कोई वैध लाइसेंस उसके पास नहीं था।

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केमिस्ट और कंपनी को नोटिस

राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने पुष्टि करते हुए बताया कि क्लीनिक से लिए गए एंटीबायोटिक दवा के सैंपल जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इस पूरे मामले में संबंधित केमिस्ट और फार्मा कंपनी दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

लोगों की सेहत की खिलवाड़

लोगों का कहना है कि यह मामला न केवल फर्जी डॉक्टरों की सक्रियता को उजागर करता है।  बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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