#विविध
April 24, 2026
ये सड़क है या धूल का गुबार? हिमाचल हाईकोर्ट ने लगाई फटकार- अफसरों को किया तलब
अदालत ने कहा कि सरकारी सुस्ती के कारण आम जनता को नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों, खासकर शिमला-ठियोग-नारकंडा मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।सड़कों की खस्ता हालत को लेकर हाई कोर्ट ने अफसरों को फटकार लगाई है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई की है। न्यायधीश ने सरकार और लोक निर्माण विभाग की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी की।
अदालत ने दो टूक कहा कि ये सड़कें सड़कें कम और धूल उड़ाने वाले रास्ते ज्यादा बन गई हैं। जिनसे न केवल वाहन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
खंडपीठ ने PWD के इंजीनियर-इन-चीफ और NHAI के मुख्य अभियंता को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि ढली से नारकंडा तक सड़क की मरम्मत और सुधार का स्पष्ट समयबद्ध प्लान अदालत के सामने रखा जाए।
अदालत ने मामले का दायरा बढ़ाते हुए ठियोग से नारकंडा तक के हिस्से को भी जांच के दायरे में शामिल कर लिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 मई को होगी। विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट में सामने आया है कि फागू के पास 2-3 किलोमीटर का हिस्सा अब भी बेहद खराब हालत में है।
जबकि, शिमला-ठियोग मार्ग के कुछ हिस्सों में सुधार हुआ है। मगर अदालत ने यह भी नोट किया कि देर से हुई मरम्मत के कारण सड़क की निचली परतें कमजोर हो चुकी है। जिससे हालिया काम के टिकाऊ होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। रिपोर्ट में पूरे मार्ग के पुनर्निर्माण की सिफारिश की गई है। अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी सुस्ती के कारण आम जनता को नुकसान झेलना पड़ रहा है।
अदालत ने विशेष रूप से इस मार्ग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह सड़क प्रदेश की एप्पल बेल्ट की जीवनरेखा है और किन्नौर के साथ भारत-चीन सीमा तक संपर्क का प्रमुख साधन भी है।
खराब सड़क के कारण पर्यटन गतिविधियों पर असर पड़ रहा है और सेब उत्पादकों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। अदालत ने यह भी माना कि सड़कों की खराब हालत HRTC के बढ़ते घाटे का एक कारण है, क्योंकि बसों की मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है।
मामले में केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि वह राष्ट्रीय राजमार्गों के सुधार के लिए धन उपलब्ध कराने को तैयार है, लेकिन राज्य लोक निर्माण विभाग की ओर से प्रस्ताव भेजने में देरी की गई है। अदालत ने इस रवैये को लापरवाही बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई।