देहरा (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला से एक बेहद हृदयविदारक और दुखी कर देने वाली खबर सामने आई है। यहां प्रागपुर क्षेत्र के मसोट गांव में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसे में करंट लगने से 45 वर्षीय प्लंबर की मौत हो गई। इस एक झटके ने एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह से उजाड़ कर रख दिया है। मृतक अपने घर का इकलौता कमाऊ सदस्य था, जो दिन-रात मेहनत करके अपने परिवार की आजीविका चला रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

मसोट गांव में काम के दौरान हुआ वज्रपात

मिली जानकारी के मुताबिक यह खौफनाक हादसा गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे पेश आया। अपर प्रागपुर के टियालू गांव के रहने वाले 45 वर्षीय कुंवरजीत सिंह उर्फ सोनू (पुत्र बलवंत सिंह) पेशे से प्लंबर थे। वह पिछले कई सालों से प्लंबिंग का काम कर अपने परिवार का पेट पाल रहे थे। गुरुवार को वह हमेशा की तरह काम के सिलसिले में मसोट गांव स्थित एक घर में प्लंबिंग की मरम्मत करने गए हुए थे। इसी दौरान कार्य करते समय वह अचानक बिजली के नंगे तारों या करंट की चपेट में आ गए, जिससे वह बुरी तरह झुलस गए।

 

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अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गईं सांसें

हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। वहां मौजूद स्थानीय लोगों और गृहस्वामी ने बिना एक पल गंवाए गंभीर रूप से झुलसे कुंवरजीत सिंह को तुरंत सिविल अस्पताल देहरा पहुंचाया। लेकिन अफ़सोस, अस्पताल के डॉक्टरों ने गहनता से जांच करने के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस खबर के मिलते ही मृतक के घर में कोहराम मच गया और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

 

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पुलिस लापरवाही के एंगल से भी कर रही तफ्तीश

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस थाना देहरा की एक टीम तुरंत सिविल अस्पताल पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर कागजी कार्रवाई शुरू की। वास्तविक कारणों की पड़ताल: देहरा के एडिशनल एसपी (ASP) नवदीप सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने इस संबंध में केस दर्ज कर लिया है। करंट लगने के असली कारणों का पता लगाया जा रहा है। लापरवाही की जांच: पुलिस इस पहलू पर भी बारीकी से जांच कर रही है कि इस दर्दनाक हादसे के पीछे कहीं किसी स्तर पर कोई प्रशासनिक या तकनीकी लापरवाही तो नहीं हुई थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

 

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पीड़ित परिवार के लिए आर्थिक मदद की मांग

इस दुखद घटना के बाद स्थानीय ग्राम पंचायत प्रधान रमेश पटियाल और प्रबुद्ध नागरिकों ने गहरा शोक प्रकट किया है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार से पुरज़ोर मांग की है कि चूंकि कुंवरजीत सिंह ही अपने पूरे परिवार का इकलौता सहारा थे, इसलिए पीड़ित परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए उन्हें बिना किसी देरी के उचित और पर्याप्त आर्थिक सहायता (Financial Assistance) उपलब्ध करवाई जाए।

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