शिमला। हिमाचल प्रदेश के रामपुर बुशहर क्षेत्र से सामने आए एक बेहद सनसनीखेज और संवेदनशील मामले में अदालत ने पूर्व पंचायत प्रधान को कड़ी सजा सुनाई है। आरोपी ने कथित तंत्र विद्या और अनिष्ट होने का डर दिखाकर एक 13 वर्षीय स्कूली छात्रा को अपने जाल में फंसाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय किन्नौर (रामपुर स्थित) ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
जानकारी के अनुसार दोषी व्यक्ति रामपुर क्षेत्र की एक पंचायत का पूर्व प्रधान रह चुका है। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर यह साबित हुआ कि उसने अंधविश्वास और भय का सहारा लेकर नाबालिग बच्ची का मानसिक शोषण किया और बाद में उसके साथ घोर नीचता की।
तंत्र विद्या का डर दिखाकर की नीचता
मामले के अनुसार पीड़िता उस समय आठवीं कक्षा में पढ़ती थी और अपनी नानी के साथ रह रही थी। एक दिन स्कूल जाते समय आरोपी ने रास्ते में उसे रोका और उसके गले में पहनी हुई रुद्राक्ष की माला को लेकर बातचीत की। इसके बाद उसने बच्ची की एक सहेली के माध्यम से यह झूठी बात फैलवाई कि माला को छूने से उसे किसी प्रकार का अलौकिक संकेत मिला है और यदि विशेष तांत्रिक प्रक्रिया नहीं की गई तो बच्ची और उसके परिवार पर बड़ा संकट आ सकता है।
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घर बुलाकर जबरदस्ती बनाए संबंध
इन मनगढ़ंत बातों और मौत के भय ने मासूम बच्ची को बुरी तरह डरा दिया। आरोपी ने इसी डर का फायदा उठाते हुए उसे अपने घर बुलाया। वहां उसने पहले बच्ची का विश्वास जीतने की कोशिश की और फिर उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। घटना के बाद भी आरोपी लगातार उसे डराता.धमकाता रहा तथा किसी को कुछ बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देता रहा। इतना ही नहींए वह फोन के माध्यम से भी बच्ची पर दबाव बनाता रहा और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करता रहा।
पीड़िता ने नानी को बताई पूरी घटना
काफी समय तक भय और दबाव में रहने के बाद पीड़िता ने आखिरकार अपनी नानी को पूरी घटना बताई। इसके बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया और मामला दर्ज कराया गया। जांच के दौरान पुलिस ने आवश्यक साक्ष्य जुटाए और वैज्ञानिक परीक्षणों की रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की।
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16 गवाओं के बयान पर मिली सजा
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत पैरवी की। अदालत में कुल 16 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें पीड़िता, उसके परिजन और अन्य महत्वपूर्ण गवाह शामिल थे। फॉरेंसिक जांच से प्राप्त रिपोर्टों ने भी मामले को मजबूत आधार प्रदान किया।
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सभी तथ्यों, गवाहियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया। न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले ऐसे अपराध समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं और दोषियों के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।
