#अपराध
August 12, 2026
हिमाचल : आइसक्रीम के बहाने 6 वर्षीय लड़की से नीचता, मां ने रंगे-हाथों पकड़ा- हुई 20 साल की सजा
एक साल चला कोर्ट केस, अब मिली कठोर सजा
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। छह वर्षीय बच्ची को आइसक्रीम खिलाने के बहाने अपने पास ले जाकर उसके साथ गलत हरकत करने के प्रयास के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया है।
किन्नौर स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय पोक्सो कोर्ट, रामपुर ने आरोपी रोशन लाल बंजारा को कुल 20 वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने यह फैसला 12 अगस्त को सुनाया।
दोषी रोशन लाल बंजारा पुत्र स्वर्गीय शोला बंजारा राजस्थान के राजसमंद जिले का रहने वाला है। उसकी उम्र करीब 45 वर्ष है और वह शिमला जिले के झाकड़ी क्षेत्र में रहकर रेहड़ी लगाकर आइसक्रीम बेचता था। उसकी रेहड़ी पीड़िता की मां की मनियारी की दुकान के पास लगती थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 3 अक्तूबर 2025 को छह वर्षीय बच्ची अपने भाई के साथ दुकान के सामने खेल रही थी। इसी दौरान आरोपी ने बच्ची को आइसक्रीम खिलाने के बहाने अपने ठेले के पास बुलाया और उसे अपने साथ ले गया।
कुछ देर बाद जब बच्ची की मां उसे लेने के लिए आरोपी की रेहड़ी के पास पहुंची तो उसने वहां संदिग्ध स्थिति देखी। मां ने तुरंत हस्तक्षेप किया और आरोपी से बच्ची को छुड़ाया। इसके बाद वह बच्ची को लेकर पुलिस थाना पहुंची और पूरे मामले की शिकायत दर्ज करवाई।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्य जुटाए और आरोपी के खिलाफ चालान अदालत में पेश किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष कुल 18 गवाह पेश किए। गवाहों के बयान और मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रमाणित माना। सरकार की ओर से इस मामले की पैरवी उप जिला न्यायवादी कमल चंदेल ने की। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों को मजबूती से रखा।
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय पोक्सो कोर्ट किन्नौर स्थित रामपुर ने रोशन लाल बंजारा को दोषी करार दिया। अदालत ने पोक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपी को कुल 20 वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अदालत का यह फैसला 12 अगस्त को आया है। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए 18 गवाहों और अन्य साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना गया। फैसला आने के बाद आरोपी को निर्धारित सजा भुगतनी होगी।
यह मामला एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत को सामने लाता है। खासकर सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों को किसी अनजान व्यक्ति के साथ भेजने से पहले अभिभावकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। इस मामले में बच्ची की मां के समय रहते मौके पर पहुंचने से घटना की जानकारी सामने आई और पुलिस तक मामला पहुंचा।