शिमला। राजधानी में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और बैंकिंग सुरक्षा तंत्र दोनों को हैरान कर दिया है। एक रिटायर्ड कर्मचारी के खाते से सिर्फ चार दिनों में 16 लाख रुपये साफ हो गए। जबकि न तो उनके पास कोई OTP आया, न उन्होंने किसी लिंक पर क्लिक किया और न ही कोई अंजान कॉल अटेंड किया।
शिमला में बड़ा साइबर फ्रॉड
पीड़ित सुन्नी क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले रिटायर्ड कर्मचारी हैं। रोजमर्रा की तरह वे 14 अक्टूबर को SBI अनाज मंडी ब्रांच पहुंचे। चेक के जरिए 2 लाख रुपये निकालने के बाद उन्होंने खाते में बाकी बची रकम जाननी चाही।
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बैंक में पता चला- खाता खाली
बैंक अधिकारियों ने बताया खाते में सिर्फ 4 लाख 34 हजार रुपये बचे हैं। यह सुनकर वे स्तब्ध रह गए, क्योंकि उनके खाते में इससे कहीं ज्यादा पैसे थे। जब स्टेटमेंट निकाला गया तो सामने आया कि 11 अक्टूबर से 14 अक्टूबर के बीच कई ट्रांजेक्शनों के जरिए कुल 16 लाख रुपये निकाल लिए गए हैं।
4 दिन में 16 लाख का घपला
चौंकाने वाली बात यह है कि इन चार दिनों के दौरान पीड़ित के फोन पर एक भी OTP नहीं आया। बिना OTP और बिना कॉल-लिंक क्लिक किए उनके खाते से कुल 16 लाख रुपये निकल लिए गए।
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थाने पहुंचा पीड़ित
पीड़ित ने पुलिस को बताया न उन्होंने किसी लिंक पर क्लिक किया, न किसी अनजान नंबर से बातचीत की, न कोई OTP आया और न किसी को बैंक डिटेल दी। इसके बावजूद खाते से इतनी बड़ी रकम साफ हो जाना साइबर सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है।
पुलिस को क्या शक?
पुलिस के शुरुआती संकेत बताते हैं कि पीड़ित का पुराना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर किसी तरह ठगों तक पहुंच गया, जो कि बैंक के रिकॉर्ड में ही एक्टिव माना जा रहा था। संभावना है कि खाते से लेनदेन के लिए ऑपरेट होने वाले SMS या मोबाइल OTP उसी पुराने नंबर पर जा रहे हों और ठगों ने उसी का दुरुपयोग किया हो।
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कई एंगल पर जांच कर रही पुलिस
शिकायत मिलने के बाद थाना सदर शिमला पुलिस ने धारा 318(4) BNS के तहत मामला दर्ज कर लिया है। शिमला SSP संजीव गांधी ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता के बैंक ट्रांजेक्शन, पुरानी मोबाइल नंबर हिस्ट्री और खाते से पैसे निकलने के तकनीकी तरीके की जांच जारी है। यह पता लगाया जा रहा है कि ट्रांजेक्शन किस माध्यम से और किस लोकेशन से किए गए।
जांच के इन एंगलों पर विशेष फोकस है—
- पुराना मोबाइल नंबर ठगों के कब्जे में कैसे गया?
- क्या किसी ने वह नंबर दोबारा एक्टिवेट कर लिया?
- क्या सिम रिप्लेसमेंट के नाम पर ठगी हुई?
- बैंकिंग सिस्टम में OTP-बायपास हुई या UPI/नेट बैंकिंग से लेनदेन?
- क्या ट्रांजेक्शन को किसी तरह OTP के बिना प्रोसेस किया गया?
- या पैसा अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर तुरंत आगे भेज दिया गया?
- किसी बैंक कर्मचारी की अनजाने में हुई लापरवाही?
- क्या नंबर अपडेट न होने की वजह से धोखाधड़ी आसान हुई?
- क्या बैंक के किसी सिस्टम का दुरुपयोग हुआ?
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आखिर खाते से पैसा कैसे निकला?
रिटायर्ड कर्मचारी ने पुलिस को बताया चार दिनों में न कोई OTP आया, न कोई कॉल और न कोई मैसेज आया। अगर कोई गतिविधि होती तो तुरंत पता चल जाता। यह कैसे हुआ, मैं समझ ही नहीं पा रहा हूं। इससे साफ है कि ठगों ने साइबर फ्रॉड के जिस तरीके का उपयोग किया, वह पारंपरिक फिशिंग या कॉल फ्रॉड से अलग है। पुलिस तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से फंड हैंडलिंग की पूरी चेन खंगाल रही है।
जनता के लिए बड़ा सबक
यह मामला सभी बैंक ग्राहकों के लिए एक बड़ी चेतावनी छोड़ता है कि पुराने मोबाइल नंबर को हल्के में न लें। अगर आप दूसरा नंबर इस्तेमाल कर रहे हैं। पुराना नंबर किसी और के हाथ लग सकता है- तो यह बहुत बड़ा जोखिम बन सकता है।
