चंबा। हिमाचल प्रदेश में सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के “व्यवस्था परिवर्तन” के दावों के बीच जमीनी हकीकत उलट नजर आ रही है। प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर आए दिन सवालिया निशान लगते रहते हैं। अब ऐसा ही कुछ सवाल प्रदेश के आकांक्षी जिला चंबा में खड़ा हुआ है। जहां एक उपमंडल की कुल 19 आयुर्वेदिक डिस्पेंसरीयों में स्टाफ की भारी कमी के कारण ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है, जिससे लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है।

लोगों को करना पड़ रहा परेशानियों का सामना

मिली जानकारी के अनुसार, चंबा जिले के दूरदराज़ क्षेत्र चुराह विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद व्यवस्थाओं में सुधार के दावे किए गए थे,

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लेकिन हकीकत यह है कि यहां की 19 आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी बिना डॉक्टर और जरूरी स्टाफ के संचालित हो रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

राम भरोसे एक लाख से अधिक आबादी का स्वास्थ्य

करीब एक लाख से अधिक आबादी वाले इस क्षेत्र में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप पड़ी हैं। ग्रामीण इलाकों के लोग इन डिस्पेंसरी पर निर्भर हैं, लेकिन वहां डॉक्टर, फार्मासिस्ट और सहायक कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि चुराह उपमंडल आयुर्वेदिक कार्यालय में केवल तीन डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं, जो पूरे क्षेत्र की जरूरतों के सामने नाकाफी हैं।

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इस संबंध में उप मंडल चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशु गर्ग ने भी स्थिति की गंभीरता स्वीकार करते हुए बताया कि उपमंडल की 19 डिस्पेंसरी में एक भी डॉक्टर तैनात नहीं है, जबकि अन्य स्टाफ की भी भारी कमी है। उन्होंने सरकार से जल्द रिक्त पद भरने की मांग की है, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

अति पिछड़ा इलाका है चुराह

गौरतलब है कि चंबा जिला देश के पिछड़े इलाकों में गिना जाता है, जहां स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की सख्त जरूरत है। इसके बावजूद चुराह जैसे क्षेत्रों में इस तरह की समस्याएं बने रहना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। यदि समय रहते इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ग्रामीणों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।

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