शिमला। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान शिमला के IGMC अस्पताल में हुआ एक विवाद अब केवल अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहा। इलाज से जुड़ा मामला देखते-देखते प्रदेशव्यापी चर्चा, डॉक्टरों की सामूहिक छुट्टी और सियासी बयानबाजी में तब्दील हो गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग डॉक्टर और मरीज से आगे अब नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाने लगे हैं।

डॉक्टरमरीज विवाद से फैला असंतोष

IGMC में सामने आए इस घटनाक्रम के बाद प्रदेशभर में बहस तेज हो गई है। किसी ने डॉक्टरों की सुरक्षा को मुद्दा बनाया, तो किसी ने मरीज के साथ हुए व्यवहार पर सवाल खड़े किए। शुक्रवार को रेजिडेंट डॉक्टर्स के एक दिन की मास लीव पर जाने से हालात और संवेदनशील हो गए, जिससे आम मरीजों की परेशानी भी बढ़ी।

 

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BJP के भीतर दिखा अलग-अलग रुख

इस पूरे प्रकरण में रोचक मोड़ तब आया, जब भाजपा के ही दो विधायक अलग-अलग पक्षों में नजर आए। चौपाल विधानसभा से विधायक बलबीर वर्मा ने घायल मरीज से मुलाकात कर उसके पक्ष में आवाज उठाई। वहीं, पांवटा साहिब से विधायक सुखराम चौधरी डॉक्टरों के समर्थन में हुए धरना-प्रदर्शन में शामिल दिखाई दिए।

क्षेत्रीय पहचान भी बनी चर्चा का विषय

मरीज और आरोपी डॉक्टर के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से होने के कारण यह मामला और संवेदनशील हो गया। दोनों ही क्षेत्र भाजपा के कब्जे में हैं, ऐसे में पार्टी के भीतर सामने आए अलग-अलग रुख ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

 

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सरकार पर विपक्ष का हमला

इस विवाद को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। पूर्व CM जयराम ठाकुर ने सरकार के फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जल्दबाजी में सख्त कदम उठाने के बजाय दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए था। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम में हालात दोनों ओर से बिगड़े।

 

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जांच जारी, सुलह की मांग तेज

पांवटा साहिब में डॉक्टर के समर्थन में रोष रैली और बाजार बंद जैसे कदमों ने मामले को और तूल दे दिया है। वहीं, प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापनों के जरिए उच्च स्तर तक बात पहुंचाने की मांग की जा रही है। फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह विवाद बातचीत से सुलझ पाएगा या सियासी रंग और गहराता जाएगा।

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