शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार एक तरफ जहां अपने तीन वर्ष पूरे होने पर जश्न मनाने जा रही है और माननीयों के भत्ते बढ़ाने के फैसले ले रही है, वहीं दूसरी ओर एचआरटीसी के हजारों पेंशनरों को नवंबर का अंत आते.आते भी पेंशन तक नहीं मिली है। सरकार के दोहरे रवैये से पेंशनरों में भारी नाराज़गी उभरकर सामने आई है। जिसके विरोध में आज शिमला में एचआरटीसी पेंशनर्ज़ ने जोरदार प्रदर्शन किया।

20 दिन बाद भी नहीं मिली पेंशन

पेंशन ना मिलने से नाराज एचआरटीसी पेंशनरों का आज शुक्रवार को एचआरटीसी मुख्यालय पुराने बस स्टैंड के बाहर एक बार गुस्सा फूट पड़ा। माह की 20 तारीख बीत जाने के बाद भी पेंशन न मिलने से परेशान पेंशनरों ने धरना.प्रदर्शन कर सुक्खू सरकार और एचआरटीसी प्रबंधन के खिलाफ कड़ा रोष जताया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पेंशनर जमा हुए और नारेबाजी के साथ अपनी आवाज बुलंद की।

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माननीयों के भत्ते बढ़ रहे, पेंशन नहीं दे रही सरकार

पेंशनरों ने कहा कि सरकार माननीयों के भत्ते बढ़ाने और अन्य सुविधाओं के लिए बजट का इंतजाम कर लेती है, लेकिन वर्षों तक ड्यूटी निभाकर रिटायर हुए कर्मचारियों को समय पर पेंशन देने के लिए पैसे नहीं हैं। पेंशनरों का कहना है कि पेंशन न मिल पाने से वे गंभीर आर्थिक संकट में फंस चुके हैं।

महीनों से मेडिकल बिल अटके

कई पेंशनरों ने बताया कि लंबे समय से मेडिकल बिलों का भुगतान लंबित है। इलाज का खर्च खुद वहन करना पड़ रहा है, जिससे बुजुर्ग पेंशनरों की बचत खत्म हो चुकी है। उनका कहना है कि सरकार बार.बार आश्वासन देती है, लेकिन हर महीने पेंशन मिलने में देरी आम हो चुकी है।

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घोषणाएं कागज़ों तक, धरातल पर शून्य

एचआरटीसी पेंशनर्ज कल्याण संगठन के महासचिव देवराज ठाकुर ने कहा कि नवंबर का अधिकांश हिस्सा बीत गया, लेकिन पेंशन अब भी जारी नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सुक्खू सरकार ने एचआरटीसी की स्वर्ण जयंती पर बड़ी.बड़ी घोषणाएं की थीं, लेकिन उनमें से एक भी धरातल पर लागू नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पेंशनरों के 2016 के वेतनमान का एरियर, मेडिकल बिल, महंगाई भत्ता, पुरानी पेंशन की मासिक देरी सब कुछ महीनों से अटका हुआ है।

 

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28 नवंबर को विधानसभा घेराव की चेतावनी

रोष व्यक्त करते हुए पेंशनरों ने घोषणा की कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया तो 28 नवंबर को वे बड़ी संख्या में विधानसभा का घेराव करेंगे। पेंशनरों का कहना है कि एचआरटीसी के करीब 8,000 पेंशनर लगातार आर्थिक असुरक्षा से गुजर रहे हैं और अब उनकी सहनशक्ति जवाब दे रही है।

भत्ते बढ़ाना आसान, पेंशन देना मुश्किल

प्रदर्शन स्थल पर मौजूद पेंशनरों ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार माननीयों के वेतन.भत्ते बढ़ाने के फैसले तत्काल ले लेती है, लेकिन आम कर्मचारियों और पेंशनरों के मामले में महीनों की देरी और बहानेबाजी की जाती है। उन्होंने कहा कि पेंशन एक हक़ है, सरकार की दया नहीं, इसलिए इसे हर महीने समय पर जारी किया जाना चाहिए।

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