#राजनीति
November 21, 2025
हिमाचल में रुका मतदाता सूचियों की छपाई का काम : 31 जनवरी तक कैसे होंगे पंचायत चुनाव?
सरकार ने पंचायतों के पुनर्गठन पर लगी रोक को हटाने का किया आग्रह
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायतों के पुनर्गठन को लेकर सरकार और राज्य चुनाव आयोग के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। पहले ही जहां राज्य निर्वाचन आयोग और हिमाचल सरकार में चल रहा विवाद कम नहीं हो रहा। वहीं, इसी बीच अब मतदाता सूचियों की छपाई का काम रुक गया है।
दरअसल, जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा मतदाताओं की सूचियों का डाटा उपलब्ध ना करवाने के कारण छपाई का काम पूरा नहीं हो रहा है। यह सूचियां रोस्टर से पहले पंचायतों तक पहुंचानी होती हैं और हर वार्ड के लिए 20 प्रतियां भेजी जाती हैं।
स्थिति और अधिक जटिल तब हो गई जब एक तरफ प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में डिजास्टर एक्ट लागू कर दिया, जबकि दूसरी तरफ राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी तैयारी के आदेश जारी करते हुए मतदाता सूचियां, बैलेट पेपर और अन्य सामग्री उठाने के निर्देश दे दिए। इसी विरोधाभास को लेकर जिलों में प्रशासनिक भ्रम की स्थिति है।
दो उपायुक्तों (जिला निर्वाचन अधिकारियों) ने इस उलझन को देखते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पूछा है कि वे किस आदेश को प्राथमिकता दें- सरकार के डिजास्टर एक्ट के प्रावधानों को या निर्वाचन आयोग के चुनावी निर्देशों को। अभी तक इस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।
सरकार ने पंचायतों के पुनर्गठन पर लगी रोक को हटाने का आग्रह किया है ताकि चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ सके। इसके साथ ही सरकार चाहती है कि आयोग मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का क्लॉज 12.1 हटाए, ताकि प्रशासनिक निर्णयों में कुछ राहत मिल सके। लेकिन आयोग ने साफ कहा है कि यह मामला कोर्ट में लंबित है और किसी भी स्पष्टता के लिए वहीं निर्णय होगा।
आयोग इस रोक को हटाने के पक्ष में फिलहाल नहीं है, जिससे चुनावी प्रक्रिया और अधिक विलंबित हो सकती है।
चुनावी प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती सरकारी मशीनरी विशेषकर शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की तैनाती है। प्रदेश में शिक्षकों और शिक्षा विभाग के स्टाफ की सबसे अधिक जिम्मेदारी पंचायत चुनावों में ही लगाई जाती है।
दरअसल, हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं का वर्तमान कार्यकाल जनवरी 2026 में पूरा हो रहा है। वर्तमान में प्रदेश में डिजास्टर एक्ट लागू है- ऐसे में 31 जनवरी तक चुनाव कैसे होंगे। अगर तब तक चुनाव नहीं हो पाते, तो पंचायतों की प्रशासनिक शक्तियां बीडीओ (खंड विकास अधिकारी) और पंचायत सचिवों को सौंपी जा सकती हैं।