शिमला। हिमाचल प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों को लेकर चल रही योजना के बीच देरी का मामला अब बड़ा रूप लेता दिख रहा है। हिमाचल पथ परिवहन निगम HRTC ने तय समय सीमा के भीतर बसों की सप्लाई न होने पर बस निर्माता कंपनी को आठ करोड़ जुर्माना ठोका है।

हिमाचल नहीं पहुंची HRTC की e-बसें

निगम प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि सप्लाई में जितनी देरी होगी, कंपनी को उतने ही दिनों के हिसाब से पेनल्टी भरनी पड़ेगी। ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक लिमिटेड कंपनी को मार्च 2026 तक सभी इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध करवानी थीं। मगर तय समय गुजरने के बाद भी सप्लाई पूरी नहीं हो सकी।

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निगम ने ठोका 8 करोड़ का जुर्माना

इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए HRTC ने अनुबंध की शर्तों के तहत यह कार्रवाई की है। दरअसल, प्रदेश सरकार और HRTC ने मिलकर कुल 297 इलेक्ट्रिक बसों का ऑर्डर कंपनी को दिया है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 424 करोड़ रुपये है।

कंपनी ने की सप्लाई में देरी

योजना के अनुसार इन बसों को चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के विभिन्न डिपो में भेजा जाना था। पहले चरण में ही करीब 50 प्रतिशत बसों की आपूर्ति होनी थी, लेकिन इसमें भी देरी सामने आई है।

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कई जगह हुआ ट्रायल

इलेक्ट्रिक बसों को लेकर प्रदेश में पहले व्यापक स्तर पर परीक्षण भी किए गए थे। HRTC ने 36 अलग-अलग स्थानों पर ई-बसों का ट्रायल करवाया। मैदानी क्षेत्रों में इन बसों का प्रदर्शन संतोषजनक रहा, लेकिन पहाड़ी इलाकों में कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आईं।

बसों में पाई गई कई खामियां

ट्रायल के दौरान यह पाया गया कि बसें एक बार चार्ज होने पर करीब 160 किलोमीटर तक ही चल पाईं। जबकि कंपनी ने 180 किलोमीटर की रेंज का दावा किया था। अब कंपनी इन खामियों को दूर करने में लगी हुई है।

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निगम ने कंपनी को दिया पैसा

निगम ने पहले ही कंपनी से सिक्योरिटी राशि जमा करवाई हुई है। अधिकारियों का कहना है कि बसों की पूरी सप्लाई होने के बाद ही भुगतान किया जाएगा और उसमें से जुर्माने की राशि काट ली जाएगी। एचआरटीसी के उपाध्यक्ष अजय वर्मा के अनुसार, इलेक्ट्रिक बसों के लिए अभी करीब एक महीने का और इंतजार करना पड़ सकता है।

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