शिमला। हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था इन दिनों गंभीर दबाव से गुजर रही है। एक तरफ शिक्षा विभाग स्कूलों में गुणात्मक सुधार और बेहतर रिजल्ट के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक कार्यों में तैनाती से पढ़ाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। पंचायत चुनावों और आगामी जनगणना अभियान के चलते हजारों शिक्षक स्कूलों से बाहर हैं, जिसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
23 हजार शिक्षक चुनावी ड्यूटी पर
प्रदेश में इस समय करीब 23 हजार शिक्षक चुनावी ड्यूटी में लगे हुए हैं। हाल ही में 51 शहरी निकायों के चुनाव संपन्न हुए हैं और अब पंचायत चुनाव तीन चरणों में होने जा रहे हैं। इन चुनावों के लिए शिक्षकों को मतदान ड्यूटी के साथ-साथ प्रशिक्षण में भी शामिल होना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि मई महीने में कई शिक्षक लगभग 20 दिनों तक चुनावी कार्यों में व्यस्त रहेंगे।
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स्कूलों में बढ़ी परेशानी
स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांगड़ा के एक स्कूल में कुल 22 शिक्षकों में से 16 शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव में लगा दी गई। ऐसे में स्कूलों में नियमित कक्षाएं चलाना चुनौती बन गया है। कई स्कूलों में दो से तीन शिक्षकों की ड्यूटी लगी है, जबकि कुछ संस्थानों से 10 से 12 शिक्षक तक चुनावी कार्यों में भेजे गए हैं।
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शिक्षा विभाग को अब जून में शुरू होने वाली जनगणना की भी चिंता सता रही है। पहली जून से शुरू हो रहे जनगणना अभियान में करीब 19 हजार कर्मचारियों की ड्यूटी लगेगी, जिनमें लगभग 12 हजार शिक्षक शामिल होंगे। ऐसे में आने वाले महीनों में भी स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी रहने की आशंका है।
विज्ञान और गणित की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की कमी चल रही है। यदि विज्ञान और गणित जैसे विषयों के शिक्षक चुनाव या जनगणना ड्यूटी में चले जाते हैं, तो उनकी जगह तुरंत वैकल्पिक शिक्षक उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा तैयारी पर पड़ रहा है।
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प्रदेश में वर्तमान में:
• 9742 प्राइमरी स्कूल
• 1732 माध्यमिक स्कूल
• 962 उच्च विद्यालय
• 1988 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय
संचालित हैं, जिनमें करीब 80 हजार शिक्षक कार्यरत हैं।
यह प्रथा ही गलत - शिक्षक संघ
राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि सरकार से आग्रह किया गया था कि शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी कम लगाई जाए, लेकिन अब भी लगभग 50 प्रतिशत स्टाफ स्कूलों से लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अन्य विभागों में भी पर्याप्त कर्मचारी हैं, उन्हें भी इन कार्यों में लगाया जाना चाहिए ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
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वहीं स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक आशीष कोहली ने माना कि गैर-शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों की तैनाती से पढ़ाई प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में कॉम्प्लेक्स प्रणाली लागू की गई है और प्रधानाचार्यों को वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
मतदान कराने वाले खुद नहीं कर पाएंगे वोट
इस बार पंचायत चुनाव में ड्यूटी दे रहे हजारों कर्मचारी स्वयं मतदान से वंचित रहेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार प्रदेश में 3754 पंचायतों के लिए 21678 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां 86712 कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है। डाक मतपत्र की व्यवस्था न होने के कारण इनमें तैनात कर्मचारी खुद वोट नहीं डाल पाएंगे।
