शिमला। मई की गर्मी में हिमाचल के हजारों घरों में इस बार सिर्फ पंखे नहीं चले, बल्कि बिजली के बिलों ने भी लोगों का पारा चढ़ा दिया। कई किराएदार ऐसे हैं, जिन्होंने महीने भर बिजली बचाकर इस्तेमाल की, लेकिन जब बिल हाथ में आया तो राहत की जगह झटका मिला।

डबल आ रहा बिजली का बिल

किसी का बिल दोगुना निकला, किसी की सब्सिडी गायब हो गई और अब सवाल उठ रहा है कि आखिर 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा करने वाली सरकार में आम आदमी इतना महंगा बिल क्यों भर रहा है?

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किराए के मकानों की सब्सिडी खत्म

शिमला से लेकर धर्मशाला, सोलन, मंडी और ऊना तक मई महीने के बिजली बिलों ने सैकड़ों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर शहरी क्षेत्रों में किराए के मकानों में रहने वाले लोगों को इस बार ऐसे बिल थमाए गए हैं, जिन्होंने लोगों के घरेलू बजट को हिला कर रख दिया है। वजह बनी है सुक्खू सरकार का वह फैसला, जिसमें एक राशन कार्ड पर दो से अधिक बिजली मीटरों पर मिलने वाली सब्सिडी बंद कर दी गई है।

लोगों की बढ़ी परेशानी

अब स्थिति यह है कि मकान मालिक को तो पहले की तरह सब्सिडी मिल रही है, लेकिन उसी मकान में रहने वाले किराएदारों को बिना किसी राहत के पूरा बिजली बिल भरना पड़ रहा है। इससे सबसे ज्यादा असर उन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ा है, जो शहरों में किराए के कमरों में रहकर नौकरी या पढ़ाई कर रहे हैं।

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किराएदारों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

सरकार के इस फैसले के बाद शहरी इलाकों में रहने वाले हजारों किराएदारों को अब फुल टैरिफ पर बिजली बिल दिए जा रहे हैं। यानी अगर किसी मकान में तीन या चार मीटर लगे हैं, तो दो मीटर तक ही सब्सिडी मिलेगी, बाकी मीटरों पर पूरा चार्ज देना होगा।

किराएदारों-मकान मालिक में विवाद

इस फैसले ने मकान मालिक और किराएदारों के बीच भी विवाद खड़ा कर दिया है। कई जगहों पर मकान मालिक अतिरिक्त बिजली खर्च का बोझ सीधे किराएदारों पर डाल रहे हैं। गरीब परिवारों का कहना है कि सरकार ने राहत देने के बजाय उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

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300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा फिर चर्चा में

दिसंबर 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने हिमाचल की जनता से 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का बड़ा वादा किया था। लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि कई उपभोक्ताओं को एक यूनिट खर्च होने पर भी पूरा बिल चुकाना पड़ रहा है।

विपक्ष का सरकार पर हमला

विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला तेज कर दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनावी वादे पूरे करने के बजाय सरकार जनता से सुविधाएं वापस ले रही है। वहीं कांग्रेस भी इस फैसले को लेकर बैकफुट पर दिखाई दे रही है।

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बिजली बोर्ड ने दी सफाई

हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL) के अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था के तहत एक राशन कार्ड पर केवल दो मीटरों को ही सब्सिडी दी जा रही है। अतिरिक्त मीटरों के लिए हिमाचल प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा तय पूर्ण टैरिफ लागू किया गया है।

गरीब परिवारों पर असर

बोर्ड अधिकारियों का तर्क है कि यह व्यवस्था सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने के लिए लागू की गई है। हालांकि उपभोक्ताओं का कहना है कि इसका असर सबसे ज्यादा आम और गरीब परिवारों पर पड़ा है।

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KYC प्रक्रिया ने भी बढ़ाई दिक्कतें

इसी बीच बिजली बोर्ड की KYC प्रक्रिया को लेकर भी कई शिकायतें सामने आई हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि उनके नाम पर ऐसे मीटर जोड़ दिए गए हैं, जिनसे उनका कोई संबंध नहीं है। इसके चलते उन्हें गलत बिजली बिल भेजे जा रहे हैं।

कई शिकायतें आ रही सामने

बिजली बोर्ड प्रबंधन ने माना है कि इस तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं। विभाग का कहना है कि उपभोक्ता अपने संबंधित सब-डिवीजन कार्यालय या विभाग की वेबसाइट के माध्यम से रिकॉर्ड में सुधार करवा सकते हैं।

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अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा करने वाली सरकार जनता को राहत दे पाएगी या फिर बढ़ते बिजली बिल आने वाले दिनों में सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन जाएंगे।

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