कांगड़ा। बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए शुरू की गई सरकारी योजना उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नूरपुर क्षेत्र में स्कूल में दी गई आयरन टैबलेट बच्चों के लिए परेशानी का कारण बन गई। स्कूल हैल्थ प्रोग्राम के तहत दी गई इन गोलियों को खाने के बाद कई बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिससे स्कूल और परिजनों में हड़कंप मच गया। गनीमत यह रही कि समय रहते बच्चों को अस्पताल पहुंचा दिया गया और बड़ा हादसा टल गया।
क्या है पूरा मामला
मामला कांगड़ा जिले के नूरपुर उपमंडल का है। यहां एक निजी स्कूल में स्कूल हैल्थ प्रोग्राम के तहत बच्चों को आयरन टैबलेट खाने को दी गईं। टैबलेट खाने के कुछ समय बाद पांच बच्चों को गैस्टिक, उल्टी और बेचैनी की शिकायत होने लगी। बच्चों की हालत बिगड़ती देख स्कूल प्रशासन ने तुरंत परिजनों को सूचना दी और बच्चों को अस्पताल ले जाया गया।
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अस्पताल में कराया गया इलाज
तबीयत खराब होने वाले चार बच्चों को तुरंत सिविल अस्पताल नूरपुर पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया। इलाज के बाद चारों बच्चों को घर भेज दिया गया। वहीं, एक बच्चे को परिजन निजी अस्पताल ले गए थे, जहां उसका भी उपचार हुआ और अब उसकी हालत पूरी तरह से ठीक बताई जा रही है।
खाली पेट दवा बनी परेशानी की वजह
इस मामले पर खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिलवर सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि स्कूल हैल्थ प्रोग्राम के तहत आयरन टैबलेट स्कूलों में नियमित रूप से दी जाती हैं और इन्हें बच्चों को खिलाने की जिम्मेदारी स्कूल अध्यापकों की होती है। उन्होंने कहा कि अगर यह दवा खाली पेट खा ली जाए, तो गैस्टिक और पेट से जुड़ी समस्या हो सकती है। प्रारंभिक तौर पर बच्चों की तबीयत खराब होने का यही कारण माना जा रहा है।
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ड्रग इंस्पेक्टर को दी गई सूचना
स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ड्रग इंस्पेक्टर को इसकी जानकारी दे दी है। ड्रग इंस्पेक्टर आयरन टैबलेट को कब्जे में लेकर उनकी जांच करेंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दवा की गुणवत्ता में कोई कमी तो नहीं थी या फिर यह मामला केवल सेवन के तरीके से जुड़ा हुआ है।
स्कूलों में दवा देने के तरीके पर उठे सवाल
इस घटना के बाद स्कूलों में बच्चों को दवा देने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को कोई भी दवा देने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उन्होंने भोजन किया हो और उन्हें दवा के संभावित प्रभावों की जानकारी भी दी जाए।
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स्वास्थ्य विभाग की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन से अपील की है कि स्कूल हैल्थ प्रोग्राम के तहत दी जाने वाली दवाओं को लेकर पूरी सावधानी बरती जाए। बच्चों को दवा हमेशा भोजन के बाद ही दी जाए और किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत स्वास्थ्य विभाग या नजदीकी अस्पताल से संपर्क किया जाए।
फिलहाल सभी बच्चे सुरक्षित हैं और उनकी हालत सामान्य है, लेकिन यह घटना सिस्टम में मौजूद लापरवाही और जागरूकता की कमी की ओर जरूर इशारा करती है।
