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May 18, 2026

कूड़े का ढेर बनने लगी पहाड़ों की रानी शिमला: सड़कों पर लगे कचरे के ढेर; 3 दिन से हड़ताल पर कर्मचारी

तीसरे दिन भी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल जारी, निगम सख्त आउटसोर्स व्यवस्था की तैयारी तेज

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Shimla Garbage Crisis

शिमला। अपनी प्राकृतिक सुंदरता और स्वच्छ वातावरण के लिए दुनिया भर में मशहूर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला अब धीरे.धीरे कूड़े के ढेर में बदलती नजर आ रही है। शहर में पिछले तीन दिनों से सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। घरों के बाहर, बाजारों, सड़कों और गलियों में कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए हैं, जिससे लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।

 

सैहब सोसायटी के सफाई कर्मचारी लगातार तीसरे दिन भी हड़ताल पर डटे रहे। सोमवार सुबह कर्मचारियों ने सीटीओ चौक पर प्रदर्शन कर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी वेतन बढ़ोतरी और अन्य मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

तीन दिन से नहीं उठा हजारों घरों का कूड़ा

शहर की सफाई व्यवस्था का जिम्मा संभाल रहे सैहब सोसायटी के 800 से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इसका सीधा असर राजधानी की सफाई व्यवस्था पर पड़ा है। पिछले तीन दिनों से हजारों घरों से कूड़ा नहीं उठ पाया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई इलाकों में कूड़ेदान भर चुके हैं और सड़कों के किनारे भी गंदगी जमा होने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं। गर्मी बढ़ने के साथ बदबू और संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। 

 

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मांगों पर अड़े कर्मचारी, आंदोलन की चेतावनी

सैहब सोसायटी कर्मचारी यूनियन का कहना है कि नगर निगम की ओर से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस लिखित फैसला सामने नहीं आया है। यूनियन अध्यक्ष Jaswant Singh ने कहा कि कर्मचारियों की मांगें लंबे समय से लंबित हैं और जब तक वेतन बढ़ोतरी सहित अन्य मांगों को पूरा नहीं किया जाता, कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटेंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम ने एजीएम बुलाने की जानकारी केवल फोन पर दी, जबकि कर्मचारियों के साथ औपचारिक बैठक कर समाधान निकालना चाहिए था। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।

 

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नगर निगम सख्त, कार्रवाई की तैयारी

उधर नगर निगम प्रशासन अब हड़ताल को लेकर सख्त रुख अपनाने लगा है। जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक सेवाएं बनाए रखने के लिए एस्मा लागू किया गया है, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारी हड़ताल जारी रखे हुए हैं। नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से लिया गया है और आचार संहिता समाप्त होते ही एजीएम बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

 

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इसके बावजूद काम पर नहीं लौटने वाले कर्मचारियों की सूची रोजाना जिला प्रशासन को भेजी जा रही है। प्रशासन अब हड़ताल में शामिल कर्मचारियों की तनख्वाह काटने और कर्मचारी नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार लगातार हड़ताल जारी रहने की स्थिति में कुछ कर्मचारी नेताओं की नौकरी तक पर संकट खड़ा हो सकता है।

आउटसोर्स मॉडल से चलेगी सफाई व्यवस्था

सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होने के बाद नगर निगम ने अब वैकल्पिक व्यवस्था पर काम तेज कर दिया है। निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था आउटसोर्स करने का फैसला लिया है और इसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

 

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नई व्यवस्था के तहत ठेकेदारों के माध्यम से हर वार्ड में सफाई कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। इन कर्मचारियों का काम घरों से कूड़ा उठाकर कलेक्शन सेंटर तक पहुंचाना होगा। इसके बाद नगर निगम अपने वाहनों के जरिए कूड़े को भरयाल प्लांट तक ले जाएगा। सूत्रों के अनुसार यदि हड़ताल जल्द खत्म नहीं हुई तो 20 मई के बाद नई आउटसोर्स व्यवस्था लागू की जा सकती है।

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