शिमला। देशभर में इंडिगो के संकट से लाखों लोगों की मुश्किलें बढ़ी है। देश की कई एयरपोर्ट्स पर यात्रियों को फ्लाइट में देरी और कैंसिलेशन का सामना करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि इंडिगो में स्टाफ की कमी के कारण भी ये समस्या पैदा हुई है और देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो में चल रहे इस क्रासिस के बाद हिमाचल प्रदेश का भी कुछ ऐसा ही हाल हैहाल में इंडिगो फ्लाइट के देरी पर आने से सोशल मीडिया पर भड़के डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री के लिए अपने विभाग यानी HRTC के चलाना मुश्किल हो गया है ।

चालकों की कमी से जूझ रहा HRTC

हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) इन दिनों ऐसी हालत में है जिसमें न बसें पूरी हैं, न चालक और इसका सीधा असर जनता की रोज़मर्रा की यात्रा पर पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में कई रूट क्लब कर दिए गए हैं, कई रूट पूरी तरह बंद पड़े हैं। नतीजा, स्कूल जाने वाले छात्रों से लेकर दिहाड़ीदार तक सभी को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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बसें भी कम और जो हैं, उन पर बढ़ रहा दबाव

शिमला जिला के पांचों एचआरटीसी डिपो में कुल 744 बसें मंजूर हैं, लेकिन उपलब्ध हैं सिर्फ 668। यानी 86 बसों की सीधी कमी। कई रूट सिर्फ इसलिए बंद हैं क्योंकि बसें नहीं हैं और जहां हैं भी, वहां निरंतर ओवरलोडिंग की समस्या बनी हुई है।

ड्राइवरों पर डबल-शिफ्ट का बोझ

चालकों के 1054 पदों में से 228 खाली हैं। जो चालक ड्यूटी पर हैं, उन्हें रोज़ाना ओवरटाइम करना पड़ रहा है। मामला इतना गंभीर हो गया है कि कई बार चालक अपनी शिफ्ट खत्म करके भी घर नहीं जा पा रहे हैं। छुट्टियां तो महीनों से सही तरह मिल ही नहीं पा रहीं।

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चालक यूनियन ने उठाई आवाज

HRTC चालक यूनियन के प्रांतीय प्रधान मानसिंह ठाकुर का कहना है कि निगम में भर्ती की प्रक्रिया तुरंत शुरू नहीं की गई तो हालात और बिगड़ेंगे। उनका आरोप है कि चालकों की कमी का बोझ अब शारीरिक और मानसिक रूप से ड्राइवरों की स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी असर डाल रहा है और इसका खतरा सीधे सड़क सुरक्षा पर पड़ सकता है।

कहां कितनी बसें कम?

डिपो स्वीकृत बसें उपलब्ध बसें
रामपुर 142 135
रोहड़ू 127 107
शिमला ग्रामीण 107 101
ढली शिमला 220 197
तारा देवी 148 118

कहां कितने चालक कम?

डिपो स्वीकृत पद उपलब्ध चालक
रामपुर 228 168
रोहड़ू 210 164
शिमला ग्रामीण 153 126
ढली शिमला 301 252
तारा देवी 162 116

 

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जनता परेशान, समाधान का इंतज़ार

ग्रामीणों का कहना है कि एचआरटीसी की ये बदहाल व्यवस्था सीधे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डाल रही है। छात्र लेट हो रहे हैं, बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचने में दिक्कत हो रही है और कामगार समय पर काम पर नहीं पहुंच पा रहे हैं।

स्कूली छात्रा की वीडियो भी हुई थी वायरल

इन सब के बीच मंडी जिले के सरकाघाट क्षेत्र में एक निजी स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा रोज की तरह सरकाघाट से शाम 5 बजे पंडोल रूट वाली HRTC बस में सवार हुई। लेकिन इस दिन चालक ने निर्धारित रूट का पालन न करते हुए बगड़ागलू में ही बस रोक दी और कहा कि“बस बड़ी है, आगे नहीं जा सकती।

5 km पैदल चलना पड़ा

बस से आगे जाने वाले यात्रियों में दो–तीन स्कूली बच्चे भी शामिल थे। चालक की मनमानी के कारण छात्रा और बाकी छात्रों को जंगलनुमा रास्तों से लगभग 5 किलोमीटर पैदल चलकर रात करीब 8 बजे अपने घर झंझैल पहुंचना पड़ा।

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