शिमला। हिमाचल प्रदेश के हजारों मरीज इलाज के लिए हर साल चंडीगढ़ स्थित PGI का रुख करते हैं। आयुष्मान भारत और हिमकेयर जैसी योजनाओं ने गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन अब इन्हीं योजनाओं का भुगतान अटकने से अस्पताल पर करोड़ों रुपये का आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

PGI के 25.61 करोड़ के क्लेम लंबित पड़े

हाल ही में सामने आई ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 31 मार्च 2025 तक आयुष्मान भारत योजना के तहत PGI के 25.61 करोड़ रुपये के 4579 क्लेम लंबित पड़े थे। इनमें से बड़ी संख्या में क्लेम पंजाब और जम्मू-कश्मीर की स्टेट हेल्थ एजेंसियों ने तकनीकी कारणों से खारिज कर दिए। लेकिन हिमाचल का मामला भी अब चिंता बढ़ाने लगा है।

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हिमकेयर के 4 करोड़ से ज्यादा बकाया

रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल सरकार की हिमकेयर योजना के तहत भी PGI का करीब 4.02 करोड़ रुपये बकाया है। यह राशि 657 मरीजों के इलाज से जुड़ी हुई है। फरवरी 2024 में हिमाचल सरकार और PGI के बीच समझौता हुआ था, जिसके तहत हिमकेयर मरीजों को कैशलेस इलाज देने की व्यवस्था लागू की गई थी।

PGI में रुक सकता है फ्री इलाज

समझौते के मुताबिक, इलाज के बाद दावा राशि 30 दिनों के भीतर जारी होनी थी, लेकिन कई महीनों बाद भी भुगतान पूरा नहीं हो पाया। वर्ष 2024-25 में PGI ने कुल 34.65 करोड़ रुपये के दावे भेजे, जिनमें से सिर्फ 27.42 करोड़ रुपये का ही भुगतान हुआ। बाकी करोड़ों रुपये अब भी लंबित हैं।

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इलाज मुफ्त, लेकिन प्रक्रिया में फंसे क्लेम

पीजीआई प्रशासन के अनुसार बड़ी समस्या मरीजों के डिस्चार्ज के समय सामने आई। कई मरीज इलाज के बाद सीधे घर चले गए और आयुष्मान या हिमकेयर काउंटर तक नहीं पहुंचे। इसके कारण बायोमेट्रिक सत्यापन, दस्तावेज अपडेट और उपचार रिकॉर्ड समय पर ऑनलाइन अपलोड नहीं हो सके।

विभागों से रिकॉर्ड जुटाने में देरी

बाद में अलग-अलग विभागों से रिकॉर्ड जुटाने में देरी हुई, जिससे कई क्लेम तय समय सीमा के भीतर फाइल ही नहीं हो पाए। कई मामलों में दस्तावेजों की कमी और तकनीकी त्रुटियों के कारण क्लेम रिजेक्ट तक कर दिए गए।

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ऑडिट रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पुरानी व्यवस्था में रियल टाइम मॉनिटरिंग की कमी थी। डिस्चार्ज के समय लाभार्थियों का अंतिम सत्यापन मजबूत तरीके से नहीं हो पा रहा था, जिसका सीधा असर भुगतान प्रक्रिया पर पड़ा।

अब लागू हुआ नया सिस्टम

इन खामियों को दूर करने के लिए पीजीआई ने अब TMC 2.0 सिस्टम लागू कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत मरीज के डिस्चार्ज से पहले उसका बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होगा। साथ ही इलाज, पहचान और योजना से जुड़े सभी दस्तावेज उसी समय ऑनलाइन अपडेट किए जाएंगे।

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करोड़ों रुपये अब भी लंबित

अस्पताल प्रशासन का दावा है कि इससे देर से क्लेम दाखिल होने और दस्तावेजी त्रुटियों की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। हालांकि फिलहाल हिमाचल समेत कई राज्यों के करोड़ों रुपये अब भी लंबित हैं।

हिमाचल के मरीजों पर क्या असर?

हिमाचल के दूरदराज इलाकों से गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़ी संख्या में मरीज PGI पहुंचते हैं। ऐसे में अगर भुगतान में लगातार देरी होती रही तो भविष्य में अस्पतालों की वित्तीय व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारों और अस्पताल प्रशासन को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिससे गरीब मरीजों का इलाज भी प्रभावित न हो और अस्पतालों को समय पर भुगतान भी मिल सके।

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