#राजनीति
May 23, 2026
आचार संहिता में कैबिनेट बैठक कर फंसी सुक्खू सरकार, एक्शन में चुनाव आयोग; मांगा स्पष्टीकरण
भाजपा नेताओं ने चुनाव आयोग में की थी शिकायत, आयुक्त ने मांगा जवाब
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों के बीच आयोजित हुई मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल बैठक अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। सूबे में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद बीते रोज बुलाई गई कैबिनेट बैठक और उसमें धड़ाधड़ लिए गए बड़े फैसलों पर अब राज्य निर्वाचन आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया है।
भाजपा की तीखी घेराबंदी और आधिकारिक शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने एक्शन मोड में आते हुए सुक्खू सरकार से इस पूरे मामले पर जवाब-तलब कर लिया है। भाजपा लगातार आरोप लगा रही है कि पंचायत चुनावों के बीच सरकार ने कैबिनेट बैठक कर कई ऐसे निर्णय लिएए जिनका चुनावी माहौल पर असर पड़ सकता है। अब चुनाव आयोग द्वारा जवाब मांगे जाने के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
भाजपा नेताओं ने कैबिनेट बैठक को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष आपत्ति दर्ज करवाई थी। पार्टी का आरोप है कि पंचायत चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद सरकार ने महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा कर मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास किया।
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इसी शिकायत के आधार पर राज्य चुनाव आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग अब यह जांच करेगा कि कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय चुनाव आचार संहिता के दायरे में आते हैं या नहीं।
भाजपा की ओर से दर्ज करवाई गई आधिकारिक शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए शनिवार को राज्य चुनाव आयोग ने सरकार को आड़े हाथों लिया। राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिल खाची ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया भाजपा की ओर से प्राप्त शिकायत के आधार पर प्रदेश सरकार से औपचारिक स्पष्टीकरण (जवाब) मांगा गया है। आयोग इस पूरे मामले कैबिनेट की टाइमिंग और उसमें लिए गए फैसलों की बारीकी से जांच चुनाव नियमों व आचार संहिता के तय प्रावधानों के तहत करेगा। सरकार के जवाब और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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भाजपा का कहना है कि कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े फैसले लिए गए। विपक्ष का आरोप है कि ऐसे निर्णय चुनावी प्रक्रिया के दौरान नहीं लिए जाने चाहिए थे, क्योंकि इससे मतदाताओं पर प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि चुनाव से ठीक पहले लिए गए फैसलों का राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया गया, जो निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की भावना के विपरीत है।
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राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने चुनाव आयोग को भेजी शिकायत में आरोप लगाया था कि आचार संहिता लागू होने के बावजूद मंत्रिमंडल बैठक में नई योजनाओं, पदों के सृजन और अन्य प्रशासनिक निर्णयों को मंजूरी दी गई। उन्होंने आयोग से पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की थी। इसके बाद भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी चुनाव आयोग से मुलाकात कर इस मुद्दे को उठाया और मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
चुनाव आयोग के इस कड़े रुख के बाद अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उनकी सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, यदि सरकार अपने जवाब में आयोग को संतुष्ट नहीं कर पाई, तो इन कैबिनेट फैसलों के क्रियान्वयन पर न केवल रोक लग सकती है, बल्कि सरकार को आचार संहिता के उल्लंघन के गंभीर आरोपों का सामना भी करना पड़ सकता है। फिलहाल, धौलाधार से लेकर शिमला की पहाड़ियों तक सुक्खू कैबिनेट के इस 'फंसे हुए' दांव की ही चर्चा जोरों पर है।
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चुनाव आयोग की ओर से स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा इसे अपनी शिकायत की पहली सफलता बता रही है, जबकि अब सभी की नजरें सरकार के जवाब और चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। पंचायत चुनावों के बीच कैबिनेट बैठक को लेकर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि विपक्ष पहले ही सरकार पर चुनावी माहौल को प्रभावित करने का आरोप लगा चुका है।