ऊना। हिमाचल के खेतों के लिए भेजी गई यूरिया खाद रातों-रात पड़ोसी राज्य के उद्योगों तक पहुंच रही है। किसानों को गोदामों में स्टॉक की कमी बताकर बहाने बनाए जा रहे हैं और पंजाब में महंगे दामों पर वही खाद बिकती दिख रही है।
हिमाचल में एक और स्कैम
इस पूरे खेल के बेनकाब होने के बाद अब सरकारी शिकंजा कसने की शुरुआत हो चुकी है। कृषि विभाग और इफको हरकत में आ गए हैं और ऊना से लेकर सीमावर्ती रास्तों तक पूरे सप्लाई नेटवर्क की परतें उधेड़ी जा रही हैं।
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बारीकी से जांच, मांगा पूरा रिकॉर्ड
आपको बता दें कि कल सुबह जिला कृषि विभाग ने इफको के जिला स्तरीय पदाधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में जिले में खाद की आपूर्ति, भंडारण और वितरण से जुड़े सभी रिकॉर्ड तलब किए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अब तक की व्यवस्था में कहां चूक हुई और किस स्तर पर गड़बड़ी हुई, इसकी बारीकी से जांच की जाएगी।
हिमाचल से पंजाब भेजी जा रही खाद
प्रारंभिक जांच में कृषि विभाग और इफको की संयुक्त टीम ने यह पता लगाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है कि खाद की खेप किन वाहनों के माध्यम से पंजाब के होशियारपुर तक पहुंचाई जा रही थी। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि खाद किन-किन गोदामों से जारी हुई और वहां से बाहर जाने से पहले किस स्तर पर मंजूरी दी गई।
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पूरे नेटवर्क की परतें
इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने के लिए सबसे पहले ऊना-गगरेट-दौलतपुर मार्ग पर स्थित गोदामों का निरीक्षण किया जाएगा। यह इलाका पंजाब की सीमा से बेहद नजदीक है और लंबे समय से यहां से आवाजाही को लेकर संदेह जताया जा रहा था।
हर एंगल की हो रही गहन जांच
जांच को और मजबूत बनाने के लिए जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली जाएगी। विभाग यह जानने की कोशिश कर रहा है कि खाद से लदे ट्रक किस समय सीमा पार कर रहे थे और क्या इसके लिए किसी तरह की फर्जी एंट्री या कागजी हेराफेरी की गई।
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किसानों के साथ हो रहा अन्याय
जिला कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि यह प्रदेश के किसानों के साथ सीधा अन्याय है। उन्होंने बताया कि हिमाचल के किसानों के लिए भेजी गई खाद अगर अवैध रूप से किसी दूसरे राज्य में पहुंचाई गई है तो इसके पीछे जिम्मेदार लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
गोदामों की भी होगी जांच
इफको के पदाधिकारियों से खाद के स्टॉक, वितरण और परिवहन से जुड़े सभी रिकॉर्ड मांगे गए हैं और जांच पूरी होने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, इफको प्रबंधन ने भी अपने अधिकारियों और गोदाम स्तर के विक्रेताओं को सख्त चेतावनी जारी कर दी है।
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कालाबाजारी करने वालों की खैर नहीं
उन्हें साफ निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी भी स्तर पर खाद की कालाबाजारी या अवैध सप्लाई में उनकी संलिप्तता पाई गई, तो उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इफको ने यह भी स्पष्ट किया है कि सिर्फ विक्रेता ही नहीं, बल्कि इसमें शामिल किसी भी अधिकारी को भी जिम्मेदारी से नहीं बचने दिया जाएगा।
परेशानी में किसान
गौरतलब है कि करीब दस दिन पहले प्रदेश के लिए 3,400 टन यूरिया खाद की खेप भेजी गई थी, जिसमें से लगभग 850 टन अकेले ऊना जिले को आवंटित की गई। इसके बावजूद वर्तमान समय में जिले के कई गोदामों में यूरिया खाद उपलब्ध नहीं है, जिससे किसानों को बुवाई और फसल की तैयारी में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यही स्थिति इस पूरे मामले को और अधिक संदेहास्पद बनाती है।
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किसानों को प्रशासन से उम्मीद
अब कृषि विभाग और iffco की संयुक्त कार्रवाई से उम्मीद की जा रही है कि इस अवैध रैकेट का जल्द पर्दाफाश होगा। भविष्य में किसानों की खाद बाहरी राज्यों में पहुंचने से रोकी जा सकेगी। किसानों की नजरें भी प्रशासन पर टिकी हैं कि दोषियों के खिलाफ कितनी सख्ती दिखाई जाती है और उन्हें उनका हक समय पर मिल पाता है या नहीं।
