बिलासपुर। प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए सरकार समय-समय पर बड़े दावे करती है, लेकिन कई बार जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है। बिलासपुर जिले के घुमारवीं क्षेत्र की रहने वाली 75 वर्षीय कृष्णी देवी की बेबसी भी कुछ ऐसी ही है। वर्ष 2025 में भारी बारिश के दौरान उनका कच्चा मकान पूरी तरह ढह गया था, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें स्थायी राहत नहीं मिल सकी।

एक साल से रसोई ही बनी आशियाना

नगर परिषद घुमारवीं के कल्याणा वार्ड की रहने वाली कृष्णी देवी पिछले एक साल से अपने टूटे हुए घर की जगह एक छोटी सी रसोई में रहने को मजबूर हैं। बरसात का मौसम शुरू होते ही उनकी चिंता और बढ़ जाती है।

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हर तेज बारिश के साथ उन्हें यह डर सताता है कि कहीं बचा हुआ यह अस्थायी ठिकाना भी सुरक्षित न रह जाए। उम्र के इस पड़ाव पर उनके लिए रोजमर्रा की जिंदगी पहले ही कठिन है, ऐसे में सुरक्षित आवास न होना उनकी सबसे बड़ी परेशानी बन चुका है।

बारिश में ढह गया था पूरा मकान

 

सितंबर 2025 में हुई भारी बारिश के दौरान कृष्णी देवी का कच्चा मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। घटना के बाद प्रशासन और राजस्व विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया, नुकसान का आकलन किया और आवश्यक रिपोर्ट भी तैयार की गई। परिवार को उम्मीद थी कि जल्द राहत राशि मिल जाएगी, लेकिन महीनों बीतने के बाद भी आर्थिक सहायता उनके खाते तक नहीं पहुंच सकी।

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पति रामदास के निधन के बाद कृष्णी देवी अकेले जीवन बिता रही हैं। उनकी दो बेटियों की शादी हो चुकी है और वे समय-समय पर मां का हालचाल लेने आती हैं। हालांकि रोजमर्रा का जीवन कृष्णी देवी को अकेले ही बिताना पड़ता है। वृद्धावस्था पेंशन ही उनकी आय का एकमात्र साधन है, जिससे घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में नया मकान बनवाना उनके लिए संभव नहीं है।

परिवार ने लगाए लापरवाही के आरोप

कृष्णी देवी की बेटी केसरी देवी का कहना है कि मकान गिरने के तुरंत बाद अधिकारियों ने निरीक्षण कर आश्वासन दिया था कि जल्द राहत राशि जारी कर दी जाएगी। लेकिन एक वर्ष गुजर जाने के बावजूद परिवार को केवल आश्वासन ही मिले हैं। उनका कहना है कि अब दूसरा मानसून भी शुरू हो चुका है, लेकिन उनकी मां आज भी सुरक्षित घर का इंतजार कर रही हैं। मदद के नाम पर केवल दो तिरपाल मिलने से अब स्थानीय लोग भी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

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क्षेत्र के लोगों का कहना है कि आपदा प्रभावित बुजुर्ग महिला को एक साल तक केवल तिरपाल देकर छोड़ देना संवेदनशील प्रशासन की तस्वीर पेश नहीं करता। उनका मानना है कि जब नुकसान का पूरा रिकॉर्ड तैयार हो चुका था और राहत योजनाएं भी घोषित थीं, तो फिर सहायता राशि जारी होने में इतनी देरी क्यों हुई। लोगों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में राहत वितरण की प्रक्रिया को तेज किया जाए।

प्रशासन ने दिया जल्द सहायता का भरोसा

घुमारवीं की पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष रीता सहगल ने बताया कि नुकसान की रिपोर्ट समय रहते तैयार कर संबंधित विभागों को भेज दी गई थी। उनका कहना है कि आपदा पीड़ितों को राहत समय पर मिलना बेहद जरूरी है ताकि उन्हें लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में न रहना पड़े।

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वहीं, एसडीएम घुमारवीं गौरव चौधरी के अनुसार कृष्णी देवी का मामला विभागीय प्रक्रिया में है और राहत राशि जारी करने की कार्रवाई अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि पीड़ित महिला को करीब एक लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है और प्रशासन अन्य आवश्यक सहयोग देने का भी प्रयास कर रहा है।

राहत कब मिलेगी, यही सबसे बड़ा सवाल

कृष्णी देवी आज भी उसी उम्मीद के साथ दिन गुजार रही हैं कि एक दिन उन्हें फिर से अपने सिर पर मजबूत और सुरक्षित छत मिलेगी। लेकिन लगातार बीतते समय ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आपदा राहत योजनाओं का वास्तविक लाभ जरूरतमंदों तक समय पर क्यों नहीं पहुंच पा रहा।