शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला की एक पंचायत में हुए चुनावों में अनोखा मामला देखने को मिला। रामपुर उपमंडल में पंचायत समिति सदस्य चुनाव के नतीजे घोषित होते ही एक स्थानीय चुनाव ने अचानक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया।

BDC चुनाव जीती महिला

विकास खंड रामपुर की धार गौरा पंचायत समिति BDC सीट पर जीत दर्ज करने वाली उम्मीदवार पूजा डोगरा को लेकर कांग्रेस, भाजपा और माकपा के बीच ऐसी राजनीतिक रस्साकशी शुरू हुई कि मामला थाने तक पहुंच गया। चुनाव परिणाम के बाद पैदा हुए इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनकर स्थानीय राजनीति को गर्मा दिया।

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राजनीतिक विवाद में बदला जश्न

धार गौरा वार्ड से चुनाव मैदान में उतरी पूजा डोगरा ने अपनी प्रतिद्वंद्वी रूपा देवी को बड़े अंतर से पराजित करते हुए शानदार जीत हासिल की। नतीजे सामने आते ही समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई और जीत का जश्न शुरू हो गया। हालांकि यह जश्न कुछ ही देर में राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया।

कांग्रेस का पहनाया पटका

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, परिणाम घोषित होने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। इसी दौरान कुछ समर्थकों ने विजेता उम्मीदवार पूजा डोगरा को बधाई देते हुए उनके गले में कांग्रेस का पटका डाल दिया।

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अचानक बदल गया माहौल

इस घटना के बाद माहौल अचानक बदल गया। अन्य दलों के समर्थकों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया और दावा किया कि विजेता उम्मीदवार उनके समर्थन से चुनाव जीती हैं।

BJP कार्यकर्ता भड़के

कुछ ही मिनटों में नारेबाजी शुरू हो गई। एक ओर कांग्रेस समर्थक जीत को अपनी उपलब्धि बताने लगे तो दूसरी ओर भाजपा और माकपा के कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया। आरोप-प्रत्यारोप के बीच माहौल तनावपूर्ण होता चला गया। स्थिति बिगड़ती देख मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने हस्तक्षेप कर विभिन्न गुटों को अलग किया और विवाद को बढ़ने से रोका।

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थाने पहुंचा मामला

चुनावी परिणाम के बाद शुरू हुई यह खींचतान शाम तक जारी रही। मामला उस समय और गंभीर हो गया जब कांग्रेस, भाजपा और माकपा के कार्यकर्ता रामपुर थाने के बाहर एकत्रित होने लगे।

पूजा डोगरा का समर्थन

तीनों दलों के समर्थक अपने-अपने तरीके से यह दावा कर रहे थे कि पूजा डोगरा उनकी विचारधारा या समर्थन से चुनाव जीतकर आई हैं। थाने के बाहर काफी संख्या में लोगों के जमा होने और लगातार नारेबाजी के कारण स्थिति संवेदनशील बन गई।

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थाने में करना पड़ा बंद

पुलिस प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए नवनिर्वाचित पंचायत समिति सदस्य को सुरक्षा के दृष्टिकोण से थाना परिसर के भीतर रखा। बढ़ते विवाद को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने सभी पक्षों से बातचीत कर माहौल को शांत करने का प्रयास किया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की।

पूजा ने पुलिस को बताया...

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब पूजा डोगरा ने स्वयं आगे आकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने पुलिस के समक्ष दिए बयान में साफ कहा कि उन्होंने पंचायत समिति सदस्य का चुनाव किसी भी राजनीतिक दल के प्रत्याशी के रूप में नहीं बल्कि एक स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर लड़ा है। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने और जीत हासिल करने में किसी राजनीतिक दल का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं रहा और वे किसी पार्टी के दबाव में नहीं हैं।

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तीनों दलों के दावे कमजोर

पूजा डोगरा के इस स्पष्ट बयान के बाद तीनों दलों द्वारा किए जा रहे दावों की धार काफी हद तक कमजोर पड़ गई। उनके बयान से यह संदेश गया कि स्थानीय स्तर पर हुए इस चुनाव को राजनीतिक दल अपनी-अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे थे, जबकि विजेता स्वयं को पूरी तरह स्वतंत्र मान रही हैं।

पूजा को सुरक्षित पहुंचाया घर

स्थिति सामान्य होने के बाद पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से विशेष व्यवस्था की। एक महिला पुलिसकर्मी की निगरानी में पूजा डोगरा को सुरक्षित उनके घर पहुंचाया गया। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई है।

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तीनों राजनीतिक दल आमने-सामने

धार गौरा वार्ड का यह चुनाव परिणाम अब केवल एक स्थानीय निकाय चुनाव की जीत तक सीमित नहीं रह गया है। इसने यह भी दिखाया है कि पंचायत और जिला परिषद स्तर के चुनावों में भी राजनीतिक दल अपनी उपस्थिति और प्रभाव साबित करने के लिए किस तरह सक्रिय रहते हैं। फिलहाल पूरे क्षेत्र में चर्चा इस बात की है कि एक स्वतंत्र उम्मीदवार की जीत ने तीन बड़े राजनीतिक दलों को आमने-सामने ला खड़ा किया।