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July 15, 2026

"किन्नर कैलाश यात्रा को बंद करो"... देव समाज बोला- देवता के आदेश को ना करें अनसुना

देव समाज बोला- हमारी आस्था के खिलाफ नहीं, परंपराओं की रक्षा की लड़ाई

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रिकांगपिओ। किसी के लिए यह भगवान शिव तक पहुंचने का पवित्र मार्ग है तो किसी के लिए सदियों पुरानी देव परंपराओं व प्रकृति की मर्यादा का सवाल। हिमाचल के किन्नौर में किन्नर कैलाश यात्रा अब सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं रह गई है, बल्कि आस्था, परंपरा और पर्यावरण के बीच टकराव की वजह बनती जा रही है।

"किन्नर कैलाश यात्रा को बंद करो".

इसी विवाद के बीच मंगलवार को रिकांगपिओ में देव समाज और स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किन्नर कैलाश यात्रा को पूरी तरह बंद किया जाए और प्रशासन चोरी-छिपे यात्रा करने वालों पर सख्त कार्रवाई करे।

 

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देव समाज बोला- हमारी आस्था के खिलाफ नहीं, परंपराओं की रक्षा की लड़ाई

टुकपा-खुनाग क्षेत्र की कई पंचायतों के ग्रामीणों और देव समाज से जुड़े लोगों ने रिकांगपिओ में आक्रोश रैली निकालकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। स्थानीय निवासी जिया लाल नेगी ने कहा कि उनका विरोध किसी श्रद्धालु की धार्मिक आस्था से नहीं है, बल्कि किन्नर कैलाश की पवित्रता, स्थानीय देव संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के लिए है। उनका आरोप है कि यात्रा के दौरान स्थानीय मान्यताओं, देव आदेशों और पारंपरिक नियमों की अनदेखी की जा रही है, जिससे क्षेत्र की धार्मिक मर्यादा प्रभावित हो रही है।

देववाणी का हवाला, यात्रा बंद करने की मांग

राम लाल नेगी ने कहा कि पोवारी, रिब्बा समेत कई गांवों के कुल देवताओं ने देववाणी के माध्यम से किन्नर कैलाश यात्रा को पूरी तरह बंद करने के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद कुछ लोग चोरी-छिपे यात्रा कर रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है।

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उनका कहना है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से पवित्र स्थल पर गंदगी फैल रही है। जल स्रोतों, दुर्लभ वनस्पतियों और प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।

प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

ज्ञान देवी, स्नेह नेगी और परमेश्वर नेगी ने कहा कि देव आदेशों के बाद पहले भी प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि प्रतिबंध के बावजूद यात्रा जारी है और प्रशासन इसे रोकने में विफल साबित हो रहा है।

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प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही अवैध यात्रा पर रोक नहीं लगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो देव समाज और ग्रामीण बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे।

फिलहाल प्रशासन ने भी यात्रा पर लगाई है रोक

गौरतलब है कि लगातार भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़े खतरों को देखते हुए जिला प्रशासन पहले ही किन्नर कैलाश यात्रा को अगले आदेशों तक स्थगित कर चुका है। इसके बावजूद कथित तौर पर कुछ लोग चोरी-छिपे यात्रा कर रहे हैं, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

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